पत्र लेखन -पत्र लेखन की आवश्यकता, स्वरूप, प्रकार, पत्र में ध्यान देने योग्य बातें | आलेखन - परिभाषा, प्रकार , महत्व, विशेषताएं |

 A. पत्र लेखन       B. आलेखन

1.पत्र लेखन की आवश्यकता 2.स्वरूप 3.प्रकार 4.पत्र में ध्यान देने योग्य बातें

B. आलेखन - 1.परिभाषा 2.प्रकार 3.महत्व 4.विशेषताएं |

1.पत्र लेखन की आवश्यकता: चिट्ठी या किसी कागज या अन्य माध्यम पर लिखे सन्देश को पत्र कहते हैं। उन्नीसवीं एवं बीसवीं शताब्दियों में पत्र ही दो व्यक्तियों के बीच संचार का सबसे विश्वसनीय तरीका था। किन्तु अब टेलीफोन, सेलफोन एवं अन्तरजाल के युग में इसकी उपयोग काफी कम हो गयी है। पत्रो का हमारे जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान है।

दस्तावेज़ीकरण के लिए:महत्वपूर्ण घटनाओं और सूचनाओं को दस्तावेज़ीकृत documentation करने और रिकॉर्ड करने का पत्र एक अच्छा तरीका है । वे सबूत के रूप में भी काम कर सकते हैं, जो अदालत में मान्य हो सकता है। घटनाओं,व्यापार व्यवसाय में दिन - तारीख, रकम , नियम - शर्तें एक लिखित रूप में उपलब्ध रहती है, जिसे समय - समय पर या आवश्यकता पड़ने पर उसी तरह प्राप्त कर सकते हैं या संदर्भ के लिए लिया जा सकता है और यह तबही संभव है जब यह दस्तावेज पत्र के रूप में हमारे पास उआपलब्ध रहता है | तुरंत ध्यान आकर्षित करने के लिए हमारे इनबॉक्स में आने वाले असंख्य मेल के बजाय एक हस्तलिखित पत्र पर तुरंत ध्यान देने की गारंटी है।

पत्र लेखन की आवश्यकता: 

अपनी सर्वोत्तम क्षमता से वही कहने की क्षमता पत्र - लिखने से मिलती है जो कहना चाहते हैं। अपने विचारों और भावनाओं को ठीक उसी तरह व्यक्त करना, पत्र में शब्दों के माध्यम से हो सकता है ' क्योंकि शब्दों का समायोजन हम शांतिपूर्वक, सोच - विचार कर के कर सकते हैं , साथ ही पत्र लेखन में हम अपने क्रोध को छुपा सकते है जबकी बात करते हैं तो शब्दों के टोन से गुस्सा व्यक्त हो जाता है जिसका दुष्प्रभाव संबंधों पर पद सकता है |

पत्र-लेखन आधुनिक युग की जरूरी आवश्यकता है। पत्र एक ओर सामाजिक व्यवहार के अपरिहार्य अंग हैं तो दूसरी ओर उनकी व्यापारिक आवश्यकता भी रहती है। पत्र लेखन एक कला है जो लेखक की अपनी रचनात्मकता,व्यक्तित्व, दृष्टिकोण एवं मानसिकता से परिचालित होती है, विचारों को प्रकट करती है | लिखित रूप में अपने मन के भावों एवं विचारों को प्रकट करने का माध्यम 'पत्र' हैं।

निश्छल भावों और विचारों का आदान-प्रदान पत्रों द्वारा ही सम्भव है। पत्रलेखन दो व्यक्तियों के बीच होता है। इसके द्वारा दो हृदयों का सम्बन्ध दृढ़ होता है। अतः पत्राचार ही एक ऐसा साधन है, जो दूरस्थ व्यक्तियों को भावना की एक संगमभूमि पर ला खड़ा करता है और दोनों में आत्मीय सम्बन्ध स्थापित करता है।

पत्र एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है जो व्यापारिक, व्यावसायिक और प्रशासनात्मक कार्य सहायता,सुचारु बनाता है तथा निर्णय लेने में सुविधा, शीघ्रता होती है |

त्र लेखन में सबसे अधिक महत्व किसका होता है?

पत्र लेखन में सबसे अधिक महत्व तथ्यों का होता है, क्योंकि पत्र व्यवहार किसी सटीक जानकारी के आदान-प्रदान हेतु किया जाता है।

यदि उस में तथ्य गलत होंगे तो एक स्वस्थ पत्राचार संभव नहीं हो पाएगा और भ्रम की स्थिति पैदा होगी।

पत्र का मुख्य अंग क्या है?

पत्र लेखन के अनेक महत्वपूर्ण अंग होते है , जिसमें उचित संबोधन और अभिवादन, पत्र भेजने वाले का नाम एवं पता, पत्र पाने वाले का नाम एवं पता, विषय-वस्तु का शीर्षक, पत्र के अंत में शिष्टाचारपूर्ण समापन आदि होते है।

किसी भी पत्र को भेजने का उद्देश्य किसी महत्वपूर्ण संदेश को किसी अन्य व्यक्ति तक पहुंचाना होता है। यदि पत्र की विषय वस्तु संतुलित और भाषा शैली सरल हो तो पत्र में लिखे गए संदेश सही रूप में प्राप्तकर्ता तक पहुंच पाएगा। इसके लिए एक अच्छे पत्र का सबसे महत्वपूर्ण अंग उसकी विषय-वस्तु तथा भाषा-शैली है।

पत्र लेखन के अनेक महत्वपूर्ण अंग होते है , जिसमें उचित संबोधन और अभिवादन, पत्र भेजने वाले का नाम एवं पता, पत्र पाने वाले का नाम एवं पता, विषय-वस्तु का शीर्षक, पत्र के अंत में शिष्टाचारपूर्ण समापन आदि होते है।

2.स्वरूप:

  • पत्र संख्या/ xx/xx/year

  • पत्र प्रेषक का नाम और उस दिन की दिनांक – ऊपर बताए गए दोनों चीजों को दाएँ कोने में लिखा जाता है । साथ ही जब भी हम किसी व्यवसाय और कार्यालय को पत्र लिखते हैं तब प्रेषक का नाम लिखना भी अनिवार्य है|

  • पत्र पाने वाले का नाम और पता – प्रेषक लिखने के बाद पत्र पाने वाले के बारे में लिखा जाता है । पत्र पाने वाले के बारे में नीचे बताए गए चीजों लिखें पत्र पाने वाले का नाम उनका पद नाम कार्यालय का नामवहां का स्थानवहां का शहर , जिला और साथ में पिन कोड भी लिखें

  • पत्र लेखन लिखने का विषय संकेत – विषय संकेत में पत्र लेखन कौन से विषय में लिखा जा रहा है उसकी जानकारी देना बहुत ही आवश्यक है।

  • पत्र लेखन में संबोधन करना आवश्यक है – विशेषण के लिखने के बाद पत्र के बाई तरफ संबोधन का प्रयोग होता है। जैसे:प्रिय भाई, प्रिय मित्र, आदरणीय बड़ों के लिए नीचे बताए गए शब्दों का प्रयोग करते हैं: पूज्य, मान्यवर,आदरणीय,माननीय |

  •  पत्र लेखन में अभिवादन करें – हमारे रिश्तेदारों को अभिवादन शब्दों का प्रयोग कर सकते हैं। जैसे:सादर नमस्ते नमस्कार प्रणाम

कार्यालय और व्यावसायिक जगह पर जब हम पत्र लिखते हैं तब अभिवादन का प्रयोग नहीं करते।

  • मुख्य सामग्री लिखें – संबोधन लिखने के बाद हम पत्र लेखन में मूल सामग्री का प्रयोग करते हैं इसके अंदर समय , परिस्थिति के अनुसार विषय लिखते हैं

  • पत्रलेखन में समाप्त के समय समापन सूचक शब्दों का प्रयोग करें – जब हम पत्र लेखन का समापन करता है तभी कुछ शब्दों का प्रयोग करते हैं। जैसे:आपका प्रिय आपका आज्ञाकारी,स्नेही,भवदीय

  • हस्ताक्षर और नाम भी लिखें – समापन शब्दों के बाद पत्र लिखने वालों को हस्ताक्षर और अपना पूरा नाम लिखना आवश्यक है।

  • संलग्नक मैं भेजें – जब भी हम सरकारी पत्र लिखता है तब उसे संलग्नक करके भेजें।

  • पुनश्च शीर्षक लिखें – पत्र लेखन लिखने के बाद उसके अंदर हस्ताक्षर और संलग्न शब्दों का प्रयोग होने के बाद उसे पुनश्च शीर्षक देकर फिर से हस्ताक्षर में लिखा जाता है।
प्रारूप/FORMAT

पत्र संख्या: xx/xx/year

प्रेषक/ From date

नाम

----- पूरा पता

सेवा में/To

नाम

------पूरा पता

विषय/ sub: ------------

श्रीमान/महोदय

मसौदा / body of the letter/मुख्य सामग्री लिखें |

पत्र समापन/

आपका विश्वासी

हस्ताक्षर

नाम,पद

संलग्नक / Encloser

पुनश्च

3.प्रकार

  • पत्र मुख्यतः दो प्रकार के होते है-

1)औपचारिक पत्र Formal: औपचारिक पत्र ज्यादातर एक दूसरे को किसी प्रार्थना-पत्र (अवकाश, शिकायत, सुधार, आवेदन के लिए लिखे गए पत्र आदि), कार्यालयी-पत्र (किसी सरकारी अधिकारी, विभाग को लिखे गए पत्र आदि), व्यवसायिक-पत्र (दुकानदार, प्रकाशक, व्यापारी, कंपनी आदि को लिखे गए पत्र आदि) प्रकार के विचार संबंधित लिखा जाता है.

2)अनौपचारिक पत्र/ Informal: अनौपचारिक पत्र उस प्रकार का पत्र है जिसे आप अपने किसी जानने वाले को लिखते हैं, जैसे कोई मित्र या परिवार का सदस्य। 

4.पत्र में ध्यान देने योग्य बातें

  • पत्र साफ़ अथवा स्पष्ट रूप में हो। कहने का अर्थ यह है कि विषय की प्रस्तुति स्पष्ट हो।
  • भाषा सरल हो। वाक्य छोटे हों। दो - तीन अनुच्छेद हों। शब्द सीमा अधिकतम 150 तक हो।
  • संबोधन, अभिवादन आदि का ध्यान रखा जाए।
  • पत्र पर भेजने वाले का नाम, पता, तिथि अवश्य होनी चाहिए।
  • एक ही पेज में पूरा होना चाहिए |
  • विषय एकदम स्पष्ट और छोटा होना चाहिए |
  • पत्र संख्या होना चाहिए |

  • पत्र लेखन कला - कौशल की आवश्यकता क्यों है ?
  • स्पष्ट संदेश लिखने से दूसरों के लिए आपके विचारों और विचारों को समझना आसान हो जाता है। कार्यस्थल पर अपनी क्षमता साबित करना : चाहे आपके काम में बहुत अधिक लेखन शामिल हो, लोगों को आपकी सामग्री से कुछ व्याकरणिक और वर्तनी संबंधी गलतियाँ याद आ सकती हैं।

    लेखन कौशल संचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अच्छे लेखन कौशल से आमने-सामने या टेलीफ़ोन वार्तालाप की तुलना में बहुत बड़े दर्शकों तक पहुँचना अधिक स्पष्ट और आसान हो जाता है। आपको कार्यस्थल पर रिपोर्ट, योजना या रणनीति बनाने के लिए कहा जा सकता है। अपने स्वयंसेवी कार्य के हिस्से के रूप में अनुदान आवेदन बनाएँ। यदि आप अपने विचारों को ब्लॉग के माध्यम से ऑनलाइन साझा करना चाहते हैं, तो आपके पास अच्छा लेखन कौशल होना चाहिए। और, यदि आप एक नई नौकरी शुरू कर रहे हैं, तो बिना किसी वर्तनी या व्याकरण संबंधी त्रुटियों के साथ एक अच्छी तरह से लिखा गया रिज्यूमे cv आवश्यक है।

    खराब लेखन कौशल से पहली छाप खराब होती है, और कई पाठक वर्तनी या व्याकरण संबंधी गलतियाँ मिलने पर नकारात्मक प्रतिक्रिया करते हैं। उदाहरण के लिए, किसी व्यावसायिक वेबसाइट की गलत वर्तनी संभावित ग्राहकों को वेबसाइट और कंपनी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने के लिए प्रेरित कर सकती है।

  • निष्कर्ष:

    कार्यस्थल पर सफलता के लिए अच्छे लेखन कौशल आवश्यक हैं। ईमेल, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, बिक्री सुझाव और अन्य टाइपो, व्याकरण संबंधी त्रुटियाँ और खराब संरचित सामग्री समान कार्य नैतिकता का सुझाव देती हैं। कार्यस्थल में एक अच्छा और प्रभावी संचार बनाने में सक्षम होने के लिए लेखन कौशल के बारे में नियमों और भेदों के बारे में पूरी तरह से जानकारी होनी चाहिए।

  • B. आलेखन: परिभाषा, प्रकार, महत्व, विशेषताएं |

  • आलेखन (Drafting) की परिभाषा

    सरकारी कार्यालयों में पत्र-व्यवहार की पद्धितियों के अनुसार पत्रों का प्रारूप या आलेख (Draft) तैयार किया जाना ही आलेखन कहलाता है। इसे प्रालेखन या प्रारूपण भी कहा जाता है।

    किसी भी सरकारी कार्यालय में कोई भी काम मौखिक नहीं होता । अधिकतर कामों के लिए पत्रव्यवहार किया जाता है। कार्यालयीन पत्र-व्यवहार में पत्र प्राप्ति पर टिप्पणी कार्य समाप्त होने के बाद उसके आधार पर पत्रोत्तर का जो प्रारूप तैयार किया जाता है, वह आलेखन कहलाता है।

    आलेख आवश्यकतानुसार लिपिक से लेकर अधिकारियों तक को तैयार करना पड़ता है अतः इसका सम्यक ज्ञान सभी के लिए आवश्यक है। आलेखन के ज्ञान के अभाव में कार्यालय की कार्यक्षमता गिरने के साथ-साथ कार्य सम्पादन में भी अनावश्यक विलम्ब होता है, अतः इसका ज्ञान हमारे लिए बहुत उपयोगी है।

    आलेखन पत्राचार का एक अंग है। समाज के विकास के साथ आलेखन के भित्र-भित्र रूप विकसित होते रहे हैं। विशेषकर सरकारी सेवाओं में और कार्यालयों में काम करनेवालों के लिए आलेखन में निपुण होना आवश्यक है। इसकी कुशलता दो बातों पर निर्भर है-

    (1) भाषा का अच्छा ज्ञान और (2) आलेखन के विविध रूपों और उसके विशिष्ट नियमों की जानकारी।

    आलेखन की सफलता शुद्ध, सुगठित और परिमार्जित भाषा पर निर्भर है। यहाँ आलेखन से हमारा तात्पर्य सरकारी कार्यालय में व्यवहृत आलेखनों से है। इसे 'प्रारूप' भी कहते हैं।

आलेखन के प्रकार: आलेखन दो प्रकार के होते है

(1) प्रारम्भिक आलेखन(Elementary Drafting)(2) उत्रत/उच्चतर आलेखन(Advanced Drafting)

(1) प्रारम्भिक आलेखन (Elementary Drafting)- प्रारम्भिक आलेखन में वैयक्तिक और सामाजिक पत्राचार आते है। इनके अन्तर्गत पारिवारिक पत्र, आवेदनपत्र, पदाधिकारियों से पत्र-व्यवहार, व्यावसायिक पत्र, सम्पादक के नाम पत्र, निमन्त्रण पत्र इत्यादि आते हैं।

(2) उत्रत अथवा उच्चतर आलेखन (Advanced Drafting)- उच्चतर आलेखन में सरकारी कार्यालयों में प्रयुक्त होनेवाले भित्र-भित्र प्रकार के पत्राचारों का समावेश होता है।

उच्चतर आलेखन का स्वरूप- आलेखन का अभिप्राय ,मोटेतौर पर पत्रों, सूचनाओं, परिपत्रों और समझौतों के आलेख (मसौदे या मसविदे) तैयार करने से है, जिनकी आवश्यकता सरकारी दफ्तरों या कार्यालयों और प्राइवेट फर्मो तथा संस्थाओं में हर दिन पड़ती रहती है। आलेखन की जानकारी न केवल सरकारी कार्यालयों में काम करनेवाले लिपिकों (clerks) और सहायकों (assistants) को होनी चाहिए, बल्कि अन्य व्यवसायों में काम करनेवाले कर्मचारियों के लिए भी जरूरी है। सरकारी कार्यालयों से अनेक प्रकार के पत्र, आदेश, परिपत्र, अधिसूचनाएँ आदि भेजी जाती है। इनका आलेख लिपिकों से उच्चतम अधिकारियों तक किसी को भी तैयार करना पड़ सकता है। अतएव, केन्द्रीय सचिवालय और राज्य सचिवालयों में काम करनेवाले कर्मचारियों के लिए आलेखन-ज्ञान अनिवार्य है।

अच्छे आलेख लेखन के क्या विशेषताएं / गुण होने चाहिए?

  • भाषा सरल और स्पष्ट होनी चाहिए।
  • विचार कथात्मक न हो कर विवेचन विश्लेषण वाले होने चाहिए।
  • आलेख से पाठक की जिज्ञासा उत्पन्न हो जाए ऐसा होना चाहिए।
  • आलेख हमेशा ज्वलंत और प्रसिद्द मुद्दों या समारोह पर होना चाहिए।
  • आलेख से भावुकता संभव हो सकती है।

  • अच्छे आलेख लेखन में क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए?

    संक्षिप्तता, शिष्टता, स्पष्टता एवं विनम्रता प्रशासनिक भाषा की अनिवार्यताएँ है। अतिशयोक्ति वाक्य,वक्रोक्ति, पुनरूक्ति तथा मुहावरों-कहावतों के लिए प्रशासनिक भाषा में कोई स्थान नहीं होता है। अत: संक्षेप में आलेखन की भाषा व्याकरण सम्मत सरल, स्पष्ट तथा परिमार्जित हो तथा उसमें संयम, गरिमा, गांभीर्य निवैयक्तिकता होनी चाहिए

  • आलेखन का महत्व: आलेखन एक सुनियोजित तरीके से लिखी हुई सामग्री होती है जिससे उसमे कोई गलती होने की संभावना कम होती है, संबंधित विषय में निर्णय लेने में शीघ्रता होती है , काम जल्दी होता है, योजनाएं समय पर सफल होती है, भ्रष्टाचार न होने की संभवन रहती है, जिन भी कर्मचारियों द्वारा यह आलेखन तैयार किया जाता है वे इसके लिए जिम्मेदार होते हैं क्योंकि यह एक व्यवस्थित प्रारूप के अंतर्गत तैयार किया जाता है और उसी के आधार पर काम किया जाता है |

    आलेखन सीखने का क्या महत्व है?

    मसौदा तैयार करने से छात्रों को अपनी प्रारंभिक योजनाओं और विचारों का विस्तार करने, स्पष्ट करने और संशोधित करने में मदद मिलती है, और इससे उन्हें अपनी सामग्री को एक सार्थक अनुक्रम या प्रवाह में व्यवस्थित करने में मदद मिलती है।

  • प्रतिवेदन / Reporting

    प्रतिवेदन का सामान्य अर्थ है किसी प्रकरण, घटना या स्थिति - विशेष की क्रमिक जानकारी (रिपोर्ट) प्रस्तुत करना । आप जानते हैं कि देश-विदेश में अनेक ऐसी घटनाएँ होती रहती हैं जिनके बारे में विस्तार से जानने के लिए हम सभी उत्सुक रहते हैं।

    अनौपचारिक रिपोर्ट का उपयोग ज्यादातर एक टीम, कॉलेज के साथियों आदि के बीच किया जाता है। सूचनात्मक रिपोर्ट: इन रिपोर्ट में एक निश्चित विषय से संबंधित सभी डेटा, आंकड़े, विश्लेषण और तथ्य शामिल होते हैं। उनका लक्ष्य इन रिपोर्टों से वास्तविक समस्याओं का समाधान करना है। प्रस्ताव रिपोर्ट: ये रिपोर्ट एक पिच की तरह हैं, और समाधान-उन्मुख हैं।

    रिपोर्ट लेखन एक निर्णय लेने वाले उपकरण के रूप में कार्य करता है जो तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेने में आपकी सहायता कर सकता है । उदाहरण के लिए, यदि आप एक छात्र हैं, तो आप निबंध या बहस में डेटा और स्रोतों के साथ अपने तर्कों या राय का समर्थन करने के लिए एक रिपोर्ट लिख सकते हैं।

    रिपोर्टें महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे किसी परियोजना का भविष्य तय कर सकती हैं, सिफारिशों को उजागर कर सकती हैं, विकल्प दिखा सकती हैं, परिणामों को उजागर कर सकती हैं, आपके प्रोजेक्ट में निवेश करने के इच्छुक निवेशकों को आकर्षित कर सकती हैं और या हितधारकों को प्रगति के बारे में सूचित रख सकती हैं।

  • प्रतिवेदनों का महत्व

    प्रबन्धकीय कार्य बिना प्रतिवेदन के उसी प्रकार है जिस प्रकार बिना हृदय का एक मानव शरीर क्योंकि एक वृद्ध व्यवसाय जिसमें लाखों कर्मचारी कार्यरत होते हैं, वहाँ प्रतिवेदन ही सम्प्रेषण का एकमात्र साधन होता है। प्रतिवेदन किसी प्रबन्धन में निर्णय लेने की क्षमता के विकास का आधारभूत उपकरण है। यह देखा गया है कि एक व्यवसायी कुल कार्यकारी समय का 80 प्रतिशत समय केवल प्रतिवेदन व पत्रों के लिखने में लगाते हैं। व्यवसाय सम्बन्धी महत्वपूर्ण निर्णय प्रतिवेदनों में उल्लिखित सूचनाओं अथाग सिफारिशों के माध्यम से लिये जाते हैं अर्थात। एक उद्योग या व्यवसाय के निरन्तर विकास के लिए प्रतिवेदन एक आवश्यक उपकरण है। व्यावसायिक प्रतिवेदन किसी संस्था विशेष की कार्य पद्धति को सुधारने व अधिक दुरुस्त करने के उद्देश्य से तैयार किये जाते हैं। आज व्यावसायिक विश्व में आपसी प्रतिस्पद्ध के चलते अधिकांश कमजोर इकाइयाँ बीच में हो बन्द हो जाती है। पिछड़ जाती है, अतः उन्हें बचाने के लिए उनकी रुग्ण स्थिति के लिए जिम्मेदार कारणों को खोजकर उनका निराकरण आवश्यक होता है, ताकि उनके व्यवसाय को पुनःस्थापित किया जा सके। इस हेतु आवश्यक है कि नि नये दृष्टिकोणों व नवीन रूपों को अपनाया जाये। ये नवीन दृष्टिकोण प्रतिवेदनों के माध्यम से ही प्रस्तावित किये। जाते हैं।

  • प्रतिवेदन हेतु संभावित प्रश्न:

1. NSS/NCC CAMP पर रिपोर्ट लिखिए |

2. कॉलेज के वार्षिकोत्सव की रिपोर्ट लिखिए |

3. कॉलेज मैगजीन में छपने के लिए nss कपं द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर पर प्रतिवेदन तैयार कीजिए |

4. न्यूज पपेर में छापने के लिए उच्छत्तम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के सम्मान समारोह का प्रतिवेदन लिखिए |

5. कॉलेज मैगजीन में छापने के लिए, आपके महाविद्यालय में आयोजित शिक्षक दिवस का प्रतिवेदन तैयार कीजिए |


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