‘वैज्ञानिक युग क्या था?क्या है?क्या होगा?’ कवित्री ‘डॉ चेतना उपाध्याय’है | सारांश:

 कल तक हम कूप मंडूक थे

आज हम विश्वव्यापी हैं,कल ब्रह्मांडव्यापी होंगे |

कल तक हम विज्ञान को प्रयोगशाला में सीमित जानते थे आज

हम विज्ञान को चमत्कारों के रूप के रूप में पहचानते हैं कल हम विज्ञान को अपनी-अपनी

हथेलियों में कैद कर पाएंगे

कल तक विज्ञान हमारा लक्ष्य था|

आज विज्ञान हमारी उपलब्धि है

कल हम विज्ञान को उपलब्ध हो जाएंगे

कल वैज्ञानिक युग अंधविश्वासी था आज परंपराओं पर चलता रूढ़िवादी है

कल लीक से हटकर भ्रमवादी होगा|

कल का वैज्ञानिक युग चमत्कारवादी था

शब्दार्थ:कूप मंडूक-कुए के मेंढक |विश्वव्यापी -पूरी दुनिया में समय जाना | ब्रह्मांडव्यापी- अंतरिक्ष और अंतरिक्ष में मौजूद सभी पदार्थ और ऊर्जा शामिल हैं।चमत्कार-अजूबे |कैद-बंद |लक्ष्य-उद्देश्य |अंधविश्वासी -तथ्यों को बिना किसी कारण सच मानना |रूढ़िवादी-समय के अनुसार न बदलना | लीक - परंपरागत |

आज नीत नवीन खोज करता खोजवादी है

कल नवीन अन्वेषणों के परिणामस्वरूप

अविष्कारवादी होगा|

कल तक युग भावनाओं से

जुड़ा भावनावादी था

आज का वैज्ञानिक युग महज कल्पनावादी है

कल का युग यथार्थवादी होगा

भूतकाल का वैज्ञानिक युग प्रयोगवादी था

वर्तमान युग कंप्यूटरवादी है

भविष्यकाल में यह युग रोबोटवादी होगा |

शब्दार्थ: नित - प्रतिदिन | अन्वेषण - नई खोज |नवीन - नई , नया |आविष्कार - खोज |भावना - विचारों | महज - केवल| यथार्थवादी-सच्चाई पर आधारित |

रोबोट - यांत्रिक मानव |

प्रश्न 1: एक शब्द या वाक्य में उत्तर लिखिए; 1 x 10=10

  • कल तक हम क्या थे? कूप मंडूक
  • हम कब तक कूप मंडूक थे? कल
  • कवित्री के अनुसार आज हम विश्वव्यापी तो कल क्या होंगे? ब्रह्मांडव्यापी
  • कल तक हम प्रयोगशाला को कितना जानते थे?सीमित
  • आज हम विज्ञान को किस रूप में पहचानते हैं?चमत्कारों
  • कल हम विज्ञान को कहाँ कैद कर पाएंगे?हथेलियों
  • कल तक हमारा लक्ष्य क्या था ? विज्ञान
  • आज हमारी उआपलब्धि क्या है? विज्ञान
  • कल हम किसे उपलब्ध हो जाएंगे? विज्ञान
  • कल वैज्ञानिक युग कैसा था ? अंधविश्वासी
  • आज रूढ़िवाद किस पर चलता है?परंपराओं
  • कल किससे हटकर भ्रमवादी होगा? लीक
  • कल वैज्ञानिक युग कैसा था? चमत्कारी
  • आज नित नवीन खोज कौन करता है?खोजवादी
  • कल नवीन अन्वेषणों के परिणामस्वरूप कैसा होगा?आविष्कारवादी
  • कल तक का युग किससे जुड़ा था ? भावनाओं
  • आज का वैज्ञानिक कैसा है ? कल्पनावादी
  • कल का युग किसके धरातल पर खड़ा होगा? यथार्थ
  • कब का वैज्ञानिक युग प्रयोगवादी था? भूतकाल
  • वर्तमान युग को कवित्री ने कौन सा युग कहा है ? कंप्यूटर
  • भविष्यकाल में कंप्यूटरवादी युग कैसा होगा ? रोबोटवादी
  • ‘वैज्ञानिक युग क्या था?क्या है?क्या होगा?’ की कवित्री का नाम ‘डॉ चेतना उपाध्याय’है |
  • सारांश: विज्ञान एक एसा क्षेत्र है जिसमें प्राकृतिक घटनाओं का अध्ययन करना और आपस में संबंध को समझना विज्ञान कहलाता है | जैसे पहले सूर्यग्रहण,चंद्रग्रहण, समुद्र में उठने वाले ज्वारभाटा( Tide) को समझते नहीं थे कि कब और क्यों होते हैं, उसके प्रति यह रहस्य बना रहता था क्योंकि जीवन कुएं के मेंढक के समान था, सीमित ज्ञान था इसलिए कवित्री ने पहले ‘कूप मंडूक’ कहा है लेकिन जैसे -जैसे हिम्मत बढ़ी ज्ञान का विस्तार हुआ तो विश्व में विज्ञान के ज्ञान का डंका बजने लगा और धीरे - धीरे ब्रह्मांड का रहस्य भी जानने लगे और ब्रह्मांडव्यापी बन गए , यूनिवर्स में कब ,क्या,क्यों होगा इसकी जानकारी रखने लगे,नक्षत्रों की स्तिथि कब कैसी होगी इसका कॅल्क्युलेशन भी आअ गया इसलिए ब्रह्मांडव्यापी कहा है | हर कोई विज्ञान को पहचानते हैं और उसके अलग -अलग रूपों का प्रयोग दैनिक जीवन में बहुत आसानी से हो रहा है| और यह वैज्ञानिक युग का ही कमाल है कि आने वाले समय विज्ञान जो पहले प्रयोगशाला तक सीमित था वह सबकी हथेलियों में होगा और हम देख रहे हैं मोबाइल फोन इसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण है कि जो विज्ञान नहीं जानता वह भी मोबाइल फोन के रूप में उसका प्रयोग कर रहा है | इसी प्रकार आज हम विज्ञान को उपलब्ध हो गए है कल तक विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं का विषय था,सिर्फ वैज्ञानिक तक ही सीमित था लेकिन आज हर व्यक्ति के जीवन का अंग बन गया है |

    जब विज्ञान रहस्य का विषय था तब तक हम अंधविश्वासी थी क्योंकि तथ्यों की जानकारी नहीं थी, कुछ भी सत्यापित नहीं था,उसके बाद परामपराओं(ट्रडिशन)के अनुसार विज्ञान को जानते थे, उसके बाद दुविधा में विज्ञान को मानते थे,धीरे-धीरे आगे बढ़ते -बढ़ते प्राकृतिक घटनाओं को सूचीबद्ध,क्रमबद्ध तथ्यों के अनुसार समझने लगे

  • कूप मंडूक कहलाने वाला मनुष्य आज प्रतिदिन नई-नई खोज कर रहा है, खोजवादी बन गया है और आने वाले समय में अन्वेषण explorations से और आने आविष्कारवादी बनता जा रहा है | अब विज्ञान के क्षेत्र में एसा कोई भी स्थान नहीं जहा मनुष्य ने विज्ञान की जानकारी लेने से बचा हो |

    कल तक वह सिर्फ भावनाओं में बंधा था लेकिन आज वह भावनाओं को अपनी ताकत बनाकर विज्ञान को जोड़ रहा है जैसे हम मनोविज्ञान का विषय लें यह सिर्फ भवनाओं का विषय है लेकिन उसमे भी विज्ञान की पहुँच से भावनाओं को पढ़कर जीवन को सुधारने में सहायता मिल रही है |

    कल तक सिर्फ कल्पना करता था लेकिन आज विज्ञान के द्वारा कल्पना को सच्चाई में बदल देने की ताकत विज्ञान से प्राप्त की, जैसे आज आसमान में हवाई जहाज का उड़ना पहले किसी की कल्पना का परिणाम है |इसी प्रकार कल्पना को सच्चाई में बदलना यथार्थवाद कहलाता है |

    भूतकाल का वैज्ञानिक युग प्रयोग करके विज्ञान को आगे बढ़ा रहा था , वर्तमान में हमारा जीवन पूरी तरह कंप्यूटर टेक्नोलॉजी पर निर्भर हो गया है और आने वाले समय में रोबोट अर्थात मशीनी मानव का युग होगा जो हमारे कमांड पर काम करेगा,इमोशन का कोई स्थान नहीं होगा| आज हम अलेक्सा को देख रहे है जो हमारे दैनिक जीवन के काम को हमारे कमांड पर कर रहा है |

    विशेषता: आज मनुष्य पूरी तरह से विज्ञान को उपलब्ध हो गया है, दैनिक जीवन में मनुष्य स्वयं रोबोट बनाता जा रहा है, इमोशनस खतम हो रहे है ,आए दिन खून - खराबा,प्रेमभाव की कमी ,धोखाधड़ी, अपराध आदि इसके अतिउपयोग के परिणाम है इसलिए हर व्यक्ति को अपनी सीमाएं निर्धारित करना चाहिए |

  • प्रश्न 4: टिप्पणी लिखिए; कोई एक 1 x 6=6

    1. वैज्ञानिक युग क्या था? 2. वैज्ञानिक युग क्या है? 3. वैज्ञानिक क्या होगा ?

    1. वैज्ञानिक युग क्या था ?: पाठ्यक्रम में सम्मिलित काव्य संकलन ‘ गद्य सुधा’ की कविता, ‘वैज्ञानिक युग क्या था?क्या है?क्या होगा?’ की कवित्री का नाम ‘डॉ चेतना उपाध्याय’है |

    भूतकाल में विज्ञान के विषय में कोई अधिक जानकारी नहीं थी, हमारा विस्तार भी संकुचित था, ज्ञान बढ़ाने के साधन और तरीके भी कम थे जिसके कारण हम अपनी जानकारी को महान समझते थे ,इसलिए हम कुएं के मेढक जैसे थे | प्राकृतिक गतिविधियों की जानकारी थी लेकिन उसके तथ्यों की जानकारी नहीं थी , उसके प्रति डर की भावना थी क्योंकि उसमे विज्ञान सिर्फ प्रयोगशालाओं तक था और वैज्ञानिक उसकी जाकारी रखते थे, हम उस प्राकृतिक घटनाओं का संबंध जीवन से नहीं जोड़ पाते थे, इसलिए परंपराओं और रूढ़िवाद के रास्ते पर चलते थे | अंधविश्वासी थे क्योंकि तथ्यपूर्ण ज्ञान का अभाव था | हर बात को भावनाओं से जोड़कर देखने की प्रवृत्ति थी इसलिए भावनावादी था|

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