‘समर शेष है”
रामधारी सिंह ‘दिनकर’
(परशुराम की प्रतीक्षा, 1953)
समर शेष है” कविता में व्यक्त ‘दिनकर’ के विचारों की विवेचना कीजिए।
‘समर शेष है’ कविता में दिनकर जी का मानवतावादी आवाज बहुत तीखी आवाज उठाई है। उन्होंने अपनी कई कविताओं में शोषक-पूँजीपतियों, जमींदारों एवं मजदूरों की यथार्थ स्थिति का सच्चा रूप चित्रण किया है। समाज में छाए भेदभाव, दीनहीन-कमजोर किसान, उजड़े उखड़े खेत-खलिहान, आर्थिक भेद - भाव , अन्याय-अत्याचार शोषण आदि को देखकर दिनकर का कविहृदय करुणा से भर उठा है, उसकी प्रतिक्रिया स्वरूप उनके मन में विद्रोह की आग भी भड़क उठती है। भारतवर्ष की आजादी के पहले से अपनी रचनाओं द्वारा पूरी शक्ति के साथ ब्रिटिश तानाशाही एवं साम्राज्यवाद का विरोध करने वाले ‘दिनकर’ निरन्तर क्रान्ति का आह्वान करते रहे।अन्य कविता लिखकर उन्होंने स्वतन्त्रता स्वाधीनता का उन्मुक्त एवं प्रसन्नभाव से स्वागत किया था। किन्तु, स्वराज्य-प्राप्ति के बाद भी दिनकर जी की मनोकामना पूरी नहीं हुई। उनकी सारी प्रसन्नता, उनका सारा उत्साह ठण्डा-मद्धिम पड़ गया। अपनी परिकल्पना और आशा के अनुरूप देश की आन्तरिक व्यवस्था एवं ‘देश-समाज-व्यक्ति’ की यथोचित प्रगति न देखकर उनकी गुस्से की आग भड़कती रही और वे अपनी उसी ओजस्वी वाणी में हुंकारते रहे। वे लोगों में व्याप्त असमानता को, भुखमरी को देखकर क्षुब्ध होते रहे और उनकी कलम व्यवस्था के विरोध-विद्रोह में बरबस आग की लपट बनती रही| आजादी के 7 वर्ष बाद भी उहोने देखा की देश के गावों की जनता को स्वतंत्रता मिलने के बाद भी उनके अधिकार नहीं मिले हैं , वही अत्याचार हो रहे हैं जब अंग्रेज थे सिर्फ अत्याचारी बदल गए हैं | इसलिए कवि कहते हैं की अब अपने देश के अत्याचारियों से समर शेष है ( युद्ध बाकी है )
1
ढीली करो धनुष की डोरी, तरकस का कस खोलो,
किसने कहा, युद्ध की बेला चली गयी, शांति से बोलो?
किसने कहा, और मत बेधो हृदय वह्रि के शर से,
भरो भुवन का अंग कुंकुम से, कुसुम से, केसर से?
कुंकुम? लेपूं किसे? सुनाऊँ किसको कोमल गान?
तड़प रहा आँखों के आगे भूखा हिन्दुस्तान।
प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या वाक्यांश या वाक्य में लिखिए :
1. कवि किसकी दोरि ढीली करने को कह रहे हैं ? धनुष
2. कवि किसके कस खोलने को कह रहे हैं? तरकस (तूणीर )
3. किसने कहा, युद्ध की बेला चली गयी, शांति से बोलो? वाक्य से कवि का क्या तात्पर्य है ?
कवि कहाना चाहते हैं कि युद्ध अभी बाकी है , शांति नहीं हुई है , अपने शर्तों की धार को पैनाकर रखो |
4. हृदय को किसके सहर से बेधने को कवि कह रहे हैं? वह्रि ( आग,अग्नि)
5. कुंकुम से, कुसुम से, केसर से किसके प्रतीक हैं? शुभ ,खुशी, शांति |
6. आखों के आगे कैसा हिंदुस्तान तड़प रहा है? भूखा
(आजादी मिलने के बाद भी देश की जनता सुखी नहीं है दुश्मन तो चले गए अपने देश के लोगों से युद्ध अभी बाकी है, अपने अधिकारों के लिए लड़ना है )
2
फूलों के रंगीन लहर पर ओ उतरनेवाले!
ओ रेशमी नगर के वासी! ओ छवि के मतवाले!
सकल देश में हालाहल है, दिल्ली में हाला है,
दिल्ली में रौशनी, शेष भारत में अंधियाला है।
मखमल के पर्दों के बाहर, फूलों के उस पार,
ज्यों का त्यों है खड़ा, आज भी मरघट-सा संसार।
7. रेशमी नगर के वासी से कवि का क्या तात्पर्य है ? दिल्ली में रहने वालों से/शासनकेंद्र
8. मखमल के पर्दों के बाहर से कवि का क्या तात्पर्य है? देश के गाँव
9. मरघट सा - संसार का क्या अर्थ है? आत्मसम्मान खोकर मुर्दे की तरह
10. ज्यों का त्यों है खड़ा का क्या अर्थ है? जैसा गुलाम भारत था आज भी वैसी ही है
3
वह संसार जहाँ तक पहुँची अब तक नहीं किरण है
जहाँ क्षितिज है शून्य, अभी तक अंबर तिमिर वरण है
देख जहाँ का दृश्य आज भी अन्त:स्थल हिलता है
माँ को लज्जा वसन और शिशु को न क्षीर मिलता है
पूज रहा है जहाँ चकित हो जन-जन देख अकाज
सात वर्ष हो गये राह में, अटका कहाँ स्वराज?
11. गाँव का अम्बर अब तक क्या ओढ़े है ?तिमिर (अंधेरा)
12. गांवों को देखाकर क्या हिल जाता है? अंत:स्थल (हृदय)
13. माँ के शरीर पर क्या नहीं है ? लज्जा वस्त्र
14. शिशु को क्या नहीं मिलता है ? क्षीर (दूध)
15. कवि ने आजादी के कितने वर्षों की बात की है ? सात वर्ष
16. आजादी के सात वर्ष के बाद भी क्या नहीं मिला? स्वराज
4
अटका कहाँ स्वराज? बोल दिल्ली! तू क्या कहती है?
तू रानी बन गयी वेदना जनता क्यों सहती है?
सबके भाग्य दबा रखे हैं किसने अपने कर में?
उतरी थी जो विभा, हुई बंदिनी बता किस घर में
समर शेष है, यह प्रकाश बंदीगृह से छूटेगा
और नहीं तो तुझ पर पापिनी! महावज्र टूटेगा
17. स्वराज कहाँ अटक गया है ? यह प्रश्न कवि किससे पुचः रहा है? दिल्ली
18. कवि ने इस कविता में किसे रानी कहा है? दिल्ली
19. कौन वेदना सह रहा है? गांवों की जानता
20. किसने सबके भाग्य को अपने कर (हाथ) में दबा रखा है? दिल्ली
21. प्रकाश कहाँ बंद है? बंदीगृह
22. प्रकाश बंदीगृह से छूटने के लिए अभी क्या बचा है? समर (युद्ध)
5
समर शेष है, उस स्वराज को सत्य बनाना होगा
जिसका है ये न्यास उसे सत्वर पहुँचाना होगा
धारा के मग में अनेक जो पर्वत खडे हुए हैं
गंगा का पथ रोक इन्द्र के गज जो अड़े हुए हैं
कह दो उनसे झुके अगर तो जग मे यश पाएंगे
अड़े रहे अगर तो ऐरावत पत्तों से बह जाऐंगे
23. स्वराज को सत्य बनाने से क्या मतलब है? सही मायनों मे स्वतंत्रता
24. सबका न्यास ( स्थान) कैसे पहुंचाना होगा ? सत्वर ( जल्दी,शीघ्र )
25. धारा मे मग (रास्ते) कौन खड़े हैं? पर्वत
26. गंगा का पथ मे क्यू खड़े हैं? इन्द्र के हाथी
27. अगर झुकेंगे तो उन्हें क्या मिलेगा ? यश
28. अगर अडे रहे तो एरावत किसके समान बह जाएंगे? पत्तों
29. अडे रहे तो पत्तों के समान कौन बह जाएंगे? एरावत
6
समर शेष है, जनगंगा को खुल कर लहराने दो
शिखरों को डूबने और मुकुटों को बह जाने दो
पथरीली ऊँची जमीन है? तो उसको तोडेंगे
समतल पीटे बिना समर की भूमि नहीं छोड़ेंगे
समर शेष है, चलो ज्योतियों के बरसाते तीर
खण्ड-खण्ड हो गिरे विषमता की काली जंजीर
30. कवि किसे खुलकर लहराने को कह रहे हैं? जनगंगा
31. कवि किसे किसको डूब जाने दो कह रहे हैं ? शिखरों
32. कवि किसे बह जाने दो कह रहे हैं ? मुकुटों
33. कवि किसे कैसी जमीन को तोड़ देने की बात कह रहे हैं? पथरीली
34. कवि किसे जमीन को कैसा बना देने कह रहे है? समतल
35. समतल पीटे का मलब क्या है? समाज मे समानता
36. कवि किसके तीर बरसाने की बात कह रहे हैं? ज्योतियों
37. विषमता की काली जंजीर किस प्रकार गिरने कवि कमाना करते हैं? खंड - खंड
38. विषमता की जंजीर को कवि ने कैसी कहा है? काली
7
समर शेष है, अभी मनुज भक्षी हुंकार रहे हैं
गाँधी का पी रुधिर जवाहर पर फुंकार रहे हैं
समर शेष है, अहंकार इनका हरना बाकी है
वृक को दंतहीन, अहि को निर्विष करना बाकी है
समर शेष है, शपथ धर्म की लाना है वह काल
विचरें अभय देश में गाँधी और जवाहर लाल
39. मनुज भक्षी क्या कर रहे हैं ? हुंकार
40. कवि किसे दंतहीन करना चाहते हैं? वृक ( भेड़िया, गीदड़)
41. किसे निर्विष करना बाकी है ? यही ( सांप, सर्प )
8
तिमिर पुत्र ये दस्यु कहीं कोई दुष्काण्ड रचें ना
सावधान! हो खड़ी देश भर में गाँधी की सेना
बलि देकर भी बली! स्नेह का यह मृदु व्रत साधो रे
मंदिर औ' मस्जिद दोनों पर एक तार बाँधो रे
समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध
जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध
42. दस्यु ( डाकू ) को किसके पुत्र कवि कह रहे है ? तिमिर ( अंधेरे )
43. मंदिर - मस्जिद पर क्या बांधने की बात कवि कह रहे हैं ? मित्रता का टार
44. पाप का भागी केवल व्याध ( शिकारी ) नहीं से कवि का क्या मतलब है? केवल अत्याचारी ही पापी नहीं है
45. जो तटस्थ है से क्या अर्थ है ? अत्याचार सहने वाले
( अत्याचारी तो पाप का भागी है ही लेकिन जो चुपचाप अत्याचार सहते है और अत्याचार होते देखते हैं वे भी पाप के भागीदार होते हैं )
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