डाक बंगला - कमलेशवर
सारांश summary
PART - 1
PAGE No - 1 - 24
- इरा और तिलक साथ - साथ काश्मीर जाते है वहीं मेजर सोलंकी भी घोड़े पर सवार आ जाते हैं|
- कश्मीर की यात्रा के दौरान इरा डाक बंगले में तिलक और सौलंकी के साथ ठहरी है।
- इरा के माध्यम से एक साधारण नारी की आन्तरिक एवं बाह्य संघर्ष को दर्शाया गया है। वह तिलक को आधी रात में जगाकर एक सुनसान स्थान पर ले जा कर अपनी आप बीती सुनाती है कि कैसे पुरुषों ने उसका उपयोग किया, उसकी भावनाओं का अपमान किया |
- अपने विषय में तिलक के विचार जानना चाहती है|
- तिलक और सोलंकी दोनों को अपने में उलझाए रखती है|
- इस उपन्यास में नारी मनोविज्ञान के सामाजिक एवं आर्थिक पक्ष का वर्णन किया है। इरा एक मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की है।
PART - 2
- इरा तिलक से कहती है कि तुम मुझे बाहों में कस कर पकड़ लो ।
- इरा तिलक से से अपनी जवानी के दिनों की अनुभूत बताती है ।
- राजकुमार के सपने देखती है कि आएगा, मुझसे शादी करके ले जाएगा।
- माँ मार चुकी थी,पिता आर्मी मे थे, इरा नौकरानियों के हाथों पालि थी।
- शिमला नाटक समारोह मे क्लब के साथ गई थी, विमल भी वहाँ गया था।
- विमल यूनिवर्सिटी में इरा के साथ पढ़ता था,वह विमल को चाहती थी ।
- इरा नाटक की बात करती थी, विमल नाटक के सेट का डिजाइन बनाता ।
- इरा अपने डैडी की इच्छा के विरुद्ध ड्रामा कॉम्पटीशन दिल्ली चली गई |
- ड्रामा कॉम्पटीशन के बाद दो साल वहीं पर विमल के साथ रही लेकिन जी तोड़ मेहनत के बाद भी सफलता न मिलने पर विमल निराश हो गया |
- विमल ने किसी से कहकर इरा को बतरा के यहाँ नौकरी दिला दी उधर डैडी ने शादी कर ली ।
- बतरा के यहाँ इरा की विमल को चुभती थी, वह छु-छुप कर पीछा करता और एक दिन चुपचाप बंबई चला गया केवल एक चिठ्ठी मे संदेश भेज कि तुम्हें भी ले जाऊँगा लेकिन नहीं लौटा
- इरा बतरा के फ्लैट मे शिफ्ट हो गई |
PART - 3
- इरा के सौन्दर्य का चौथा रूप देखा जब सोलंकी पर बिफर पड़ी ।
- इरा सब कुछ बता देने के बाद भी कहती है'अभी भी कुछ बाकी है जो मैं तुम्हें नहीं बताया सकती ,
- बतरा हरफनमौला था, दुनिया की सारी बातों का नापा तुला ज्ञान उसे था, राजनीति और दर्शन से लेकेर रि के बाजार भाव तक,अखबार को दीमक की तरह चाटता था |
- बतरा एक रात जल्द ही क्लब से लौटा, उसी रात शीला भी टैक्सी से आई, इरा ने इसे पहली बार देखा
- बतरा ने बताया कि शीला उसकी पत्नी है, शीला के आते ही घर का नक्शा बदल गया
- शीला ने एक दिन इरा को साड़ी दी और उस दिन इरा भी दोनों के साथ क्लब गई
- वोल्गा क्लब में ही सोलंकी को इरा ने पहली बार देखा था जब वह बतरा से हाथ मिलाने आया था
- छ: महीने बाद शीला टैक्सी में बैठकर चली गई, बतरा ने खिड़की से ही 'बाई - बाई' कहा
- बतरा ने बताया कि शीला बहुत बुरी है, रावलपिंडी में दोनों रहते थे , एक - दूसरे से प्यार करते थे, बंटवारे में बिछड़ गए, शीला इसी तरह लोगों के घर उनकी पत्नी बनकर रहती है , माँ - बहन को इसी पेशे से पाल रही थी,शिमला से माँ को 1000 रुपये का मनीआर्डर करती है |शीला नाम बदल - बदल कर यह काम करती थी
- इरा बतरा के साथ रहने लगती है, वह माँ बनने वाली होती है तब बतरा धोखे से गर्भपात कराता है
- शीला वापस आती है वह सहन नहीं कर पाती कि इरा उसकी जगह ले
- इरा को नौकरी हटाकर जाने का आदेश देती है , बतरा इस बीच नहीं आता है
- बतरा अपनी पड़ोसन मि । कृषणन के जरिए ट्यूटर - गार्जियन की नौकरी दिला देता है |
- तीसरा भाग इरा के जीवन का दुखद , करूण अध्याय है |वह कहती है 'मेरी जिंदगी का तीसरा मोड है |'
PART - 4
- डॉ चंद्रमोहन के बच्चे 8 और 10 साल के रंजन और विजन, डॉ की उम्र 50 के ऊपर
- डॉ की इकलौती बहन शिलांग में रहती थी
- डॉ डिब्रूगढ़ इरा और बच्चों के साथ चला जाता है, इरा से शादी करता है
- इरा डॉ के व्यवहार से परेशान हो अपनी सहेली दमयन्ती के पास नागपूर चली जाती है
- डॉ को असम के विद्रोहियों ने गलती से गोली मार दी, कंपाउंडर ने इरा को तार देकर बुलाया|
- 4-5 दिन के बाद डॉ मर गया, इरा के मन भी करुणा उपज गई थी और वह चाहती थी कि डॉ जीवित रहे |
- डॉ इरा के लिए 25000/- छोड़ गया
- दोनों बच्चे डॉ की बहन के साथ शिलांग गए |
- तिलक, सोलंकी, इरा कश्मीर घूमने गए ,ममदू के साथ कोलहाई ग्लेशियर ,दुधसर लेक देखने गए |
- यात्रा जोखिम भरी थी
- मामर की आवाज से घाटियां - पहाड़ गूंज जाते थे लेकिन वह किसी को हानि नहीं पहुंचाता था|
PART - 5
- इरा,सोलंक और तिलक ममाडु के साथ दुधसर लेक देखाकर और मौत के मुंह से बचकर आ गए थे |
- डाक बंगले वाले चौकीदार ने समझ ल्या था कि इतनी देर हो गई है तो ये लोग जिंदा नहीं बचे होंगे, ममाडु बहुत शर्मिंदा था|
- चार - पाँच दिन बाद तिलक दिल्ली चला गया |
- जाने से पहले इरा सेमिलने गया था वहाँ सोलंकी पहले से ही था, इरा उसे नहलाने की जिद कर रही थी,सोलंकी ने बताया कि उसे नहाने बुखार आ जाता है, वह बटोर कर लाए हुए पत्थरों को देख रहा था|
- सोलंकी रेसीडेंसी रोड पर तिलक को मिला तो उसने बताया कि बिना बताए और समान लिए इरा कहीं चली गई है,उसने मेरे साथ मेरठ चलाने का प्रोग्राम भी बनाया था| वह बहुत परेशान था|
- दो साल पहले इरा तिलक को मिली तो उसने बताया कि दमयन्ती ने पत्र लिखकर बताया कि विमल मुझे ढूँढता उसके घर आया इसलिए बिना बताए चली गई नहीं तो सोलंकी मुझे जाने नहीं देता|
- 12 साल बाद विमल आया था, वह बीमार था ,इरा उसे लेकर दिल्ली चली गई, इलाज कराया लेकिन 1 साल बाद वह मार गया|
- अब अकेली रहती है, कुत्ते का झबरा पिल्ला पाल लिया है, विमल का समान जतन से कमरे में रखा है
- नई नौकरी के लिए इरा चंडीगढ़ जाती है, तिलक कालका मेल मे उसे बिठाता है |
शीला और इरा का चरित्र शीर्षक 'डाक बंगला' को सार्थक करती है कि उनके जीवन में अपने - पराए आए, कुछ देर ठहरे और चले गए
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