माधवी
माधवी - अंक -1 दृश्य -1
कथावाचक: माधवी नाटक की भूमिका को स्पष्ट करते हुए कहता है कि धर्मग्रंथों में मनुष्य के बहुत सारे गुणों में से कर्तव्यपरायणता को सबसे बड़ा गुण बताया है |
कर्तव्यपालं क्या है कि अगर किसी को वचन दिया तो उसे हर कीमत पर पूरा करना|
तुलसीदास ने कहा है कि -
रघुकुल रीत सदा चली आई
प्राण जाहीन पर वचन न जाहिं |
कथावचक कर्तव्यपरायणता की कहानी महाभारत के एक प्रसंग से सुनाते हैं |जिसमें विष्णु भगवान का एक भक्त गालव जो ऋषि विश्वामित्र का शिष्य है, 12 वर्ष में 12 विद्याएं सीखने के बाद गुरु दक्षिणा देने की जिद करता है तो ऋषि विश्वामित्र गुस्से में 800 अश्वमेघी घोड़े मांग लेते है |गालव घोड़े नहीं दे पाने की स्तिथि में आत्महत्या करना चाहता है तो विष्णु भगवान अपने वाहन गरुडदेव को भेजकर, सहायता लेने के लिए,राजा ययाति के आश्रम में भिजवाते हैं | पराक्रमी राजा ययाति राजपाट छोड़कर आश्रम मे आ गए हैं लेकिन अहंकार भी साथ लाए हैं , दुनिया में नाम कमाने के लिए अपनी बेटी माधवी को गालव के हाँथ सौंप देते हैं कि इससे चक्रवर्ती पुत्र पैदा करा कर अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर लेनी जिससे ययाति का नाम दानवीरों की श्रेणी में बना रहे|
माधवी से न तो कुछ बताया - पूछा जाता है वह केवल एक वस्तु है जिसका उपयोग पिता ने अपनी कर्तव्यपरायणता के लिए और गालव अपनी प्रतिज्ञा पूरी करता है, माधवी का वरदान उसके लिए अभिशाप बन गया|
आश्रमवासी 1 - 2 ययाति को इस काम के लिए अनुचित ठहराते हैन लेकिन ययाति आत्मतुष्टि के लिए लालायित था माधवी को दान की वस्तु मन लेता है, आश्रमवासी फिर यही कहते हैं कि माधवी के भाग्य में तो पत्ररानी बनना लिखा है वह तो दान करने के बाद भी रानी बनेगी |
https://youtu.be/m8UBE6xhfEkअंक - 1 दृश्य - 2
कथावचक: राजाओं के दिल की थाह कोई नहीं पा सकता है| कहाँ तो महाराज ययाति अपनी इकलौती बेटी का स्वयंवर रचाने जा रहे थे और कहाँ तो एक पल में उसे विडा कर दिया ! शायद सोचा हो कि उसे रानी तो बनना ही है तो क्यों न दान में देकर मनीकुमार की सहायता ही कर दें ! कौन जाने भविष्य में क्या लिखा है,इस प्रकार गालव और माधवी अश्वमेघी घोड़ों की तलाश में निकल पड़ते हैं,कौन जाने एसा प्रतापी राजा कौन होगा जिसके पास 800 अश्वमेघी घोड़े मिलेंगे| गालव के मन माधवी से पैदा होने वाली संतान को लेकर विचार आते हैं कि अगर मई ही माधवी से पुत्र प्राप्त कर लूँ तो मुझे क्या जरूरत है 800 घोड़ों का इंतजाम करने की| फिर उसे अपना कर्तव्य याद आता है कि वह अपनी प्रतिज्ञा से भटक रहा है|, गुरु महाराज ने मुझे गुरु दक्षिणा देने की जिद के कारण यह सजा दी है | तबही आकाशवाणी भी होती है कि मुनीकुमार तुम भटक रहे हो,माधवी के मिले ही चक्रवर्ती राजा बनाने के सपने देख रहे , अपने गुरु और ययाति के साथ धोखा करोगे, देवता सभी तुमपर नजर रखे हैं|
माधवी पर मोहित भी है गालव| माधवी दुखी है कि वह केवल एक वस्तु के समान प्रयोग की जा रही है कि पिता ने मुझे सौंप दिया और तुम्हारे लिए किसी राजा के पास रहूँगी ! माधवी गालव को समझाना चाहती है कि अपने गुरु से जाकर माफी मांग लो अब भी समय है लेकिन वह नहीं मानता |
माधवी अंक -1 दृश्य - 3 :
अयोध्या के महाराज हर्यश्च का दरबार, ऊंचे सिहानसन पर राजा बैठे हैं, मंत्री, दरबारी आदि हैं| दूसरी तरफ धूल में सने, थके - हारे गालव और माधवी |
हर्यश्च ने गालव से कहा कि आपकी बात तो मैंने सुन लि लेकिन मई कैसे विश्वास करूँ कि तुम सच कह रहे हो? यह जो लड़की साथ में है वो तो राजकन्या नहीं बल्कि कोई भील की बेटी लगती है , इसकी जांच अपने राजज्योतिष से करवाना होगा | राजाजीओटीश माधवी के शरीर की जांच कर बताता है कि राजकन्या है और चक्रवर्ती बालक को जन्म देने के लक्षण भी हैं| तब हर्यश्च कहते हैं कि पुत्र जन्म होने पर ही अश्वमेघी घोड़े दिए जावेंगे और सिर्फ 200 घोड़े ही हमारे पास हैं|
यह सुन कर गालव निराश हो जाता है, हर्यश्च कहता है कि बालक को जन्म देने के बाद माधवी चाहे तो यहाँ रह सकती है या जा सकती है, माधवी कहती है कि जब 800 घोड़े किसी भी राजा के पास हो ही नहीं सकते तो मैं यहाँ बालक को जन्म देने के बाद दूसरे राजा से पुत्र पैदा करूंगी, यही एक रास्ता है कि एक दिन मै अपने पिता और तुम्हारी प्रतिज्ञा से छूट सकती हूँ और वह यह बताती है कि एक ब्रह्मचारी ने चिर कुमारी रहने का वरदान दिया है कि अनिष्ठान करके फिर से मेरा शरीर कुवारी कन्या के समान हो जाएगा |
माधवी को अंत:पुर में सजाकर ले जाते हैं, उसके कंधों पर दुकूल (रेशमी वस्त्र) डालकर मुकुट पहनकर ले जाते हैं| माधवी को लगता है कि उसे जेल में ले जाया जा रहा है |
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