घर और बाहर - महादेवी वर्मा-BANGALORE UNIVERSITY गद्य कौशल-2 BBA.BHM.MTA. BBA - AVIATION

 घर और बाहर - महादेवी वर्मा


सारांश 

  • अपनी परम्परागत स्थिति को सुधारने के लिए नारी को सर्वप्रथम शिक्षित होने की आवश्यकता है।
  • शिक्षित नारी नए दृष्टिकोण को अपनाकर घर और बाहर के सार्वजनिक जीवन को अपना कार्यक्षेत्र बना सकती है।
  • आर्थिक स्वतन्त्रता Financial freedom का अभाव उसकी पारिवारिक और सामाजिक स्थिति को दयनीय बनाए हुए हैं।
  • नारी की विवशता पर लेखिका ने दयनीय दृष्टि नहीं डाली है, बल्कि वह नारी की अंतरचेतना को झकझोर कर उसे (नारी को) उसके कर्त्तव्यों के साथ अधिकारोें के प्रति भी सजग करती है।
  • वे नारी को आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न बनाने की प्रेरणा देती है इस प्रकार वे नारी की परवशता की स्थिति को दूर करने, उसे घर की चारदीवारी से बाहर निकलने की प्रेरणा देती है।
  • नारी घर -बाहर दोनों में उचित सामंजस्य रखते हुए अपने जीवन को इस रूप में समन्वय करे कि वह अपने साथ-साथ परिवार, समाज देश के लिए उदाहरण बने।
  • आज की नारी घर की सीमा से बाहर निकलकर सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक क्षेत्र में भी अपनी भूमिका निभा रही है।
  • भारत की नारी अभी भी इस समस्या से जूझ रही है, लेखिका चाहती है कि उसकी इस दुविधा को दूर करने के लिए पुरुष वर्ग सामने आकर उसका सहयोगी बने।
  • युगों से परदे के पीछे रहकर जीवन को ही अपना भाग्य मानने वाली स्त्री को जब अवसर मिला तो उसने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अपनी शक्ति का लोहा मनवा लिया।


  • प्रश्न 1: एक वाक्य या शब्द में उत्तर लिखिए                            1 x10=10
  • युगों से नारी का कार्यक्षेत्र कहाँ तक सीमित रहा? घर
  • लेखिका के अनुसार किशोर युवक और युवतियों की शिक्षा के लिए हमें किसकी आवश्यकता होगी? महिलाओं
  • लेखिका के अनुसार शिक्षा समान और कौन से क्षेत्र मे महिलाओं का सहयोग जरूरी है? चिकित्सा
  • स्त्री में स्वाभाविक कोमलता किसकी अपेक्षा अधिक होती है? पुरुषों
  • चिकित्सा के समान और किस क्षेत्र में कहिलाओं की आवश्यकता है? कानून
  • घर और बाहर का प्रश्न उच्च ,माध्यम और कैसे वित्त वाले गृहस्थ के लिए है? साधारण
  • लेखिका को क्या विश्वास है की नारी घर और बाहर को को कैसे प्रमाणित कर सकती है? कुशलता
  • लेखिका ने नारी से घर और बाहर में में कैसा संतुलन बनाने की अपेक्षा की है? उचित
  • आत्म - संतुष्टि और समाज सेवा के धर्म को निभाने के लिए नारी को घर और बाहर में क्या बिठाना होगा ? संतुलन
  • 'घर और बाहर' संभाषण के रचनाकर कौन हैं ? महादेवी वर्मा

  • प्रश्न 2: ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए; कोई -   2 x7=14
  • वह समझ चुकी है कि उसके जीवन का उद्देश्य गृहकार्य नहीं है बल्कि उसे अपना मानसिक विकास करके देश में अपना योगदान करना है |

    संकेत: वह ---------------------------------------------------- करना है |

    प्रसंग: यह गद्यांश 'गद्य कौशल' में मे संकलित महादेवी वर्मा के संभाषण ' घर और बाहर' से लिया गया है

    संदर्भ: लेखिका ने नारी जीवन के प्रति सहानुभती प्रकट की है और उसकी योग्यताओं का परिचय देते हुए पाठकों से कह रही हैं|

    व्याख्या: वह पहला समय था जब परिवार और समाज नारियों के लिए निर्णय लिया करते थे और उसी अनुरूप नारी भी गृहकार्य को ही अपने जीवन का उद्देश्य मानकर जीवन जीती थी लेकिन अब समय बदल गया है, वह पढ़ - लिखकर अपनी योग्यता से परिवार के साथ - साथ देश की प्रगति में अपना योगदान देना चाहती है |

    विशेषता: लेखिका ने संदेश दिया है कि नारी इतनी योग्य है कि वह दर और बाहर में उचित संतुलन बनाकर सभी को खुश रख सकती है और आत्मसंतुष्टि प्राप्त कर सकती है क्योंकि एसा करने से उसकी सम्पूर्ण प्रतिभा का फायदा देश और परिवार को मिल सकता है, वह भी खुश रहेगी 

  • प्रश्न 4:टिप्पणी लिखिए : कोई एक 1 x5=5

    1. घर और बाहर                          2. नारी जीवन

    1 घर और बाहर

  • यह शीर्षक 'गद्य कौशल' में मे संकलित महादेवी वर्मा के संभाषण ' घर और बाहर' से लिया गया है|

    इस संभाषण में लेखिका ने महिलाओं के प्रति सच्ची सहानुभूति व्यक्त की है और एक नारी होकर नारी की सच्चाई को जानते समझते हुए बताया है कि जब नारी कार्य का कार्य क्षेत्र घर - परिवार तक था तब वह समय और परिसतिथियों के अनुसार किया गया था लेकिन अब समय बदल गया है महिला घर और बाहर मे उचित संतुलन बनाकर अपनी सेवा से देश के काम आने की पवित्र इच्छा रखती है , और कुछ क्षेत्र तो इसे हैं कि महिलायें बहुत अच्छी तरह संभाल सकतीं हैं , जिसमें शिक्षा, चिकित्सा, कानून आदि क्षेत्रों मे तो महिलाओं का होना अत्यंत आवश्यक है | शिक्षा के क्षेत्र में लेखिका के अनुसार युवतियों के स्थान पर गृहनियाँ अधिक अच्छी तरह सम्हाल सकेंगी और उन क्षेत्रों को भी महिलाओं की नितांत आवश्यकता है, समय के साथ नारी प्रति सोच बदलना जरूरी है |

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