मातृ मंदिर में - सुभद्रा कुमारी चौहान

 मातृ मंदिर में

सुभद्रा कुमारी चौहान

  • सारांश :
  • देश के स्वतंत्रता के स्वप्न कवित्री देखती है |
  • स्वप्न टूटने पर भी भारत माँ के सुंदर रूप और माँ का प्यार - दुलार प्रेरित करता है |
  • परतंत्र भारत में अपने ही देश की भाषा और जनता की माँ भारत माता दोनों ही गरीब कहे गए |
  • अपने ही देश में कुछ अपने ही लोगों द्वारा अत्याचार किया जा रहा
  • माँ भारती का प्यार हमारी मातृ भाषा में पाकर नई ऊर्जा मिलती थी |
  • स्वप्न में माँ भारती को सजा धजा देखाकर आश्चर्य तो हुआ लेकिन यह भी सत्य है कि इस महान भूमि को किसी श्रंगार की आवश्यकता नहीं
  • लेकिन संतान तो माँ से सभी तरह के हाथ करते हैं और अपनी इच्छा पूरी करते हैं |
  • इसी तरह वह भी माँ को सजा सँवरकर सुख पाती है |
  • कवित्र अकेली ही नहीं भारत माता के तीस करोड़ संतान हैं , सभी को मातृ भाषा में माँ से प्रेम मिलता है |
  • मुझे पूरा विश्वास है कि मातृ भाषा ही पार्लियामेंट / संसद का आधार होगी , संविधान मातरु भाषा में लिखा जाएगा |
  • मातृ भाषा ही हमें एक सूत्र में बांधकर रखेगी |

  • विशेषता: मातृ भाषा वह सूत्र है जो संस्कृति को समृद्ध करती है , चरित्र निर्माण करती है
  • मातृ भाषा के कारण विभिन्नता होने पर भी एकता रहती है |
  • मातृ भाषा के कारण हम देश - समाज और देशवासियों से भावात्मक जुड़ाव का अनुभव करते हैं |
  • एक शब्द या वाक्य में उत्तर लिखिए: 1 x 10=10

    • किस भाषा में हमे माँ का प्यार मिला? मातृ भाषा
    • मातृ भाषा कविता में मातृ भाषा की तुलना किसकी वीणा से की है? कृष्ण
    • कवित्र किसके सुंदर वस्त्र - आभूषण देखाकर चकित रह जाति है? माँ
    • कवित्री ने माँ की मूर्ति को कैसी कहा है ? भव्य
    • कवित्र ने कितने करोड़ दहसवासियों की बात कही है?तीस / 30
    • कवित्री के अनुसार भारत मे स्वतरता प्रभात किसके कारण होगा? मातृभाषा
    • माँ का शुभ वंदन कौन करेगा? वीर
    • मारतउभाषा को किसका आधार बनाने की कामना कवित्री ने की है ? पार्लियामेंट
    • प्रश्न 2: ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए 7 x 2=14

      अपने व्रत --------------- मिलाने में|

      प्रसंग: काव्य कनक कविता संकलन की 'मातृभाषा' से ली गई पंक्तियाँ हैं जिसकी रचनाकार सुभद्रा कुमारी चौहान हैं

      संदर्भ: कवित्री ने मातृ भाषा के प्रेम और आजादी की आकांक्षा प्रकट की है |

      व्याख्या: दे श को स्वतंत्र कराने में मातृभा की विशेष भूमिका होगी और उन्हें विश्वास है की संसद में देश की मातृभाषा का विषश स्थान होगा , यही भाषा बिछडे दिलों को मिलाएगी और आपसी प्रेम बढ़ाएगी , यही मेरा व्रत इसके लिए अपने प्राण भी दूँगी |

      विशेषता: भाषा वह साधन है जो आपसी बैर-भाव को दूर करने सहायक है,इसके लिए वे प्रतिज्ञा करती है|

      शब्दार्थ:वंदन - प्रार्थना | पार्लियामेंट - संसद |


    • https://youtu.be/rC4O4_PSrrk
    • प्रश्न 4: टिप्पणी लिखिए: 5 x 1=5

    • मातृ भाषा

      यह शीर्षक काव्य कनक कविता संकलन की 'मातृभाषा' से ली गई पंक्तियाँ हैं जिसकी रचनाकार सुभद्रा कुमारी चौहान हैं

      कवित्री ने इस कविता में देशवासियों की मातृ भाषा के महत्व को बताया है कि जिस धरती पर हम जन्म लेते हैं, बढ़ते हैं, पढ़ते हैं वह धरती भी हमारी माँ होती है और जिस भावनाओं से हम मातृभूमि से जुडते हैं वही हमारी मातृभाषा होती

    • है, मातृभाषा की विशेष भूमिका होतो है जब हम देशवासी विभिन्नता होकर एक साथ रहते है , मातृभाषा का सूत्र हमें आपस में एक - दूसरे से मजबूती से जोड़कर रखता है | कवित्री ने आशा व्यक्त की है कि मातृ भाषा में ही संविधान की रचना होगी और पार्लियामेंट का आधार भी मातृभाषा ही होगी |

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