1. सूझ, का साथी-
मोम-दीप मेरा!
कितना बेबस है यह
जीवन का रस है यह
छनछन, पलपल, बलबल
छू रहा सवेरा,
अपना अस्तित्व भूल
सूरज को टेरा-
मोम-दीप मेरा!
शब्दार्थ: सूझ - समझ | बेबस - लाचार,मजबूर | टेरा - बुलाया |
2 । कितना बेबस दीखा
इसने मिटना सीखा
रक्त-रक्त, बिन्दु-बिन्दु
झर रहा प्रकाश सिन्धु
कोटि-कोटि बना व्याप्त
छोटा सा घेरा!
मोम-दीप मेरा!
शब्दार्थ: झर रहा - गिर रहा | सिंधु - समुद्र | व्याप्त - छाया हुआ
3. जी से लग, जेब बैठ
तम-बल पर जमा पैठ
जब चाहूँ जाग उठे
जब चाहूँ सो जावे,
पीड़ा में साथ रहे
लीला में खो जावे!
मोम-दीप मेरा!
शब्दार्थ: जेब - शांत | तम - बल - अंधेरे की ताकत |पीड़ा - दुख | लीला - खुशियां |
https://youtu.be/wwmgisgKH1Y
4. नभ की तम गोद भरें-
नखत कोटि; पर न झरेंपढ़ न सका, उनके बल
जीवन के अक्षर ये,
आ न सके उतर-उतर
भूल न मेरे घर ये!
इन पर गर्वित न हुआ
प्रणय गर्व मेरा
मेरे बस साथ मधुर-
मोम-दीप मेरा!
शब्दार्थ: नभ - आकाश | नखत-नक्षत्र, ग्रह | कोटि - करोड़ों | गर्वित - गर्व , घमंड |
5. जब चाहूँ मिल जावे
जब चाहूँ मिट जावे
तम से जब तुमुल युद्ध-
ठने, दौड़ जुट जावे
सूझों के रथ-पथ का
ज्वलित लघु चितेरा!
मोम-दीप मेरा!
शब्दार्थ: तम - अंधेरा | तुमुल - कोलाहल, हो-हल्ला, हलचल। ज्वलित - जलता हुआ | लघु चितेरा - छोटा चित्रकार |
6. यह गरीब, यह लघु-लघु
प्राणों पर यह उदार
बिन्दु-बिन्दु
आग-आग
प्राण-प्राण
यज्ञ ज्वार
पीढ़ियाँ प्रकाश-पथिक
जग-रथ-गति चेरा!
मोम-दीप मेरा!
शब्दार्थ: लघू - छोटा | यज्ञ ज्वार - यज्ञ के प्रकाश | चेरा - दास |
सारांश :
कवि ने दीपक को सूझ का साथी कहा है क्योंकि दिया जो होता है वह अंधकार को दूर करता है और अंधेरा सूझ - बुझ खो देने का प्रतीक है | इसलिए कवि कहते हैं कि यह दीप मुझे हर कठिन समय में रास्ता दिखाने वाला साथी है |
लेकिन दीपक की सच्चाई यह है कि जब उजाला आने लगता है तो दीपक का कोई महत्व नहीं रहता है, यही दीपक की बेबसी है ,लाचारी है, परंतु दीपक इस परिसतिथि को ही जीवन का रस मानता है | दीपक कहता है कि जैसे - जैसे सुबह होने लगती है तो प्रकाश पलपल अर्थात धीरे - धीरे , छनछन अर्थात हल्की हल्की रोशनी आने लगती है और जब सुबह हो जाती है तो तेज प्रकाश छा जाता है |
अपना अस्तित्व भूल, सूरज को टेरा- मोम-दीप मेरा!
दीपक की महानता और बेबसी यही है कि वह अपने अस्तित्व की सच्चाई को जनता उआर मान्यता है कि सूरज के आगे दीपक का कोई अस्तित्व नहीं तो वह अपने आप को भूलकर मानो सूरज को स्वयं बुला लेता है |मोम दीप अर्थात स्वयं को जलाकर - पिघला कर दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाता है |
कई दीपक के बारे में कहते हैः कि सुबह आते ही दीपक के महत्व को काम होते देख लग रहा था कि यह दीपक अपनी सच्चाई से कितना मजबूर लग रहा है कि अब तक वह अपने छोटे से प्रकाश से अंधेरा दूर कर रहा था लेकिन सूरज के आते ही उसे मिटाना होगा | मतलब यह कि दीपक ने मिटाना सीखा है , दूसरों के लिए मिट जाना ही दीपक का जीवन है
रक्त-रक्त, बिन्दु-बिन्दु, झर रहा प्रकाश सिन्धु - मतलब यह कि खून का एक - एक बूंद वह अपने को जलाने में लगा रहा है , तेल को कवि ने यहाँ दीप का रक्त माना है | और अपाने आप को जला कर वह समुद्र के जैसा विशाल प्रकाश फैला रहा है |
कोटि-कोटि बना व्याप्त,छोटा सा घेरा! दीपक का छोटा सा प्रकाश पुंज करोड़ों - करोड़ लोगों के जीवन छा जाता है | अर्थात व्यक्ति का छोटा या बड़ा होना कोई मतलब नहीं रखता , दूसरों की सहायता करने की इच्छा होना चाहिए , जैसे दीपक! और यह मोम दीप एसा ही है कि स्वयं को जलाकर दूसरों को उजाला देता है और यह दीपक अपनी सच्चाई को सहर्ष स्वीकार करता है |
व्याख्या: दीपक अपने अस्तित्व के मिट जाने की सच्छाई को सकारात्मक रूप से स्वीकार करते हुए कहता है कि मैं अपने जी को या हृदय को जलाकर दूसरों को प्रकाश देता हूँ, लेकिन जब सूरज के प्रकाश के सामने हार जाता हूँ शांत हो जाता हूँ तो मैं उस तम को , अंधेरे को अपनी ताकत बना लेता हूँ और उस अंधेरे पर अपना अधिकार की बात करता है कि यही मेरी ताकत है कि जब चाहे मुझे जला ले और जब चाहें मुझे बुझा दें लेकिन सूरज तो अपने समय पर आता है और समय पर चला जाता है | इतना ही नहीं पीड़ा में साथ रहे, लीला में खो जावे!मोम-दीप मेरा! मतलब यह है कि जब जीवन में अंधेरा रहता है तब छोटा दीपक ही राह दिखाता है और खुशियां आते ही खो जाता है | अर्थात सूरज की चाचौनध रूपी खुशियों में, लीलाओं में दीपक को अनदेखा कर देते है लेकिन दीपक इसे अपनी शक्ति बताता है |
कवि ने अंधेरे के महत्व को बताते हुए काहा कि आकाश के गोद में करोड़ों नक्षत्र हैं , ग्रह हैं लेकिन यह सब अंधेरे में ही चमकते हैं , सूर्य के प्रकाश में आकाश के नक्षत्र होते हुए भी नहीं दिखाई देते हैं , वे सदा अपनी जगह पर स्थिर रहते हैं , कभी नहीं झड़ते हैं, उन नक्षत्रों की सहायता से मानव जीवन में भविष्यवाणियाँ होती हैं और उन नक्षत्रों का प्रभाव मानव जीवन पर पड़ता है | और ये भूल से मेरे घर नहीं आते बल्कि अंधेरे में चमकते है, परंतु मुझे कभी इस प्रेम पर घमंड नहीं होता है ,मैं तो बस अपने को दूसरों को प्रकाश देने में ही जलता रहता हूँ ,मेरे साथ मेरा मोम दीप जल रहा है , खुशी से समाप्ति की ओर बढ़ रहा है |
इस पद में दीपक के छोटे आकार और प्रकाश के फायदे बताते हुए कहते हैं कि मुझे जब चाहें बुझा देते , जब चाहे जला लें , इतना ही नहीं जब अंधेरे से लड़ाई होती है, युद्ध रूपी कोलाहल, हो-हल्ला, हलचल हो, तो यह छोटा सा दीपक ही उस अंधेरे से लड़ कर प्रकाश ले आता है, छोटा ही सही दीपक अनेकों सूझ - बुझ को जन्म को जन्म देता है , यह जलता दीपक अंधेरे में कई राक्षते दिखाता है | मानों यह दीपक कोई चित्रकार है |
अंतिम पद में कहा है कि दीपक का याकर छोटा होता है इसलिए उसे गरीब कहा है जिसका मतलब यह है कि छोटे दीपक की ताकत ज्यादा है लेकिन उसका आकार छोटा है इसलिए उसे गरीब कहा है | दीपक अपने प्राणों को दूसरों को राह दिखाने के लिए त्याग देता है, अपने जीवन का छोटे से छोटा कण आग मे जलाकर अपने प्राणों को त्याग देता है मानों वह यज्ञ की ज्वाला में आहुति दे रहा है | अपने प्रकाश से कई पीढ़ियों को प्रकाशित कर रहा है और अपने प्राणों को आहूत कर रहा है | इतना ही नहीं यह पूरी दुनिया के रथ की गति का दास बनकर अपना कार्य निष्ठा से करता है | यही मेरा मोम दीप , नाजुक, कोमाल दीपक स्वयं जलकर दूसरों को लाभ पहुंचाता है |
विशेषता: जीवन की सच्चाई को सकारात्मक रूप से स्वीकारना चाहिए, दूसरों की सहायता करना चाहिए | जो स्तिथि हमारे वक्ष में नहीं रहती उसकी सच्चाई को स्वीकार करने का संदेश दिया है और हमारी यह सोच या एटीट्यूट हमे निराश नहीं होने देती यही हमारी ताकत बन जाती है |संदेश दिया गया है कि हर व्यक्ति में कुछ शक्तियां और कमियाँ भी होती लेकिन अपनी कमजोरी को पहचान कर उसे ताकत बनाना चाहिए |और दुख में भी खुशी ढूँढने के लिए कहते हैं | अपने आप की कमजोरियों में जो ताकत है उसे पहचाहना एक नई स्फूर्ति भर देती है , इसलिए आत्म विश्लेषण करना जरूरी है और इसी तरह हमारी रचनात्मकत बढ़ती है | दीपक अपनी विशेषता बताया रहा है कि सबका अपना-अपना महत्व होता है कि हर छोटि या बड़ी परिसतिथि में दीपक हमेशा बड़ा काम करता है और यही इसकी ताकत है | दीप को गरीब से अर्थ यह है कि सामर्थ्य तो अधिक है लेकिन जीवन छोटा है फिर भी अपने प्राणों को उदारता से दूसरों के लिए अमाप्त कर देता है , इस से संदेश मिलता है कि अपने कार्य को निष्ठापूर्वक और ईमानदारी से करना चाहिए | अपने कार्य को , दूसरों को राह दिखाने को यज्ञ के समान पवित्र बताया है |
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