आनंद के क्षण - ललित निबंध - कन्हैयालाल मिश्र

 सारांश एवं विशेषता:जीवन में आनंद का क्षण आ गया था। उसकी मैं उपेक्षा नहीं कर सकता। इस प्रकार आनंद के क्षण को लेकर राष्ट्रपति और जीवनशास्त्री ने अपने अपने मत प्रकट किए। लेखक गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर के इस प्रसंग द्वारा उपदेश देते है कि स्वयं को कष्ट देकर भी हमें अपने तथा दूसरों के जीवन में आनंद परोसने का कार्य करना चाहिए।

  • जीवन शास्त्री ने सलाह दी कि मित्र से बात करते समय घड़ी का मुंह दीवाल की तरफ घूमा देना चाहिए
  • गुरुदेव रवीन्द्रनाथ के संदर्भ मे लेखक ने संदेश दिया है कि कष्ट सहकर भी हमे अपने और दूसरों के जीवन मे आनंद के क्षण देना चाहिए |
  • कवि सम्मेलन मे रामचन्द्र शुक्ल और उनके मित्र ने शब्दों के उचित प्रयोग से श्रोताओ को हंसा - हँसाकर आनंदित किया |
  • ग्रेस केली के गर्भवती होने के किस्से को अबोध बच्ची की नासमझी  ने परिवार को कै दिनों तक गुदगुदाया
  • व्यंग्य बाण से एच. जी. वेल्स ने अभिनेत्री को करारा जवाब दिया और उसका घनद भी तोड़ कर आनंद के क्षण प्राप्त किए |

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