तूने क्या सपना देखा है? हरिवंशराय बच्चन- सारांश - व्याख्या

 तूने क्या सपना देखा है? हरिवंशराय बच्चन

लक रोम पर बूँदें सुख की,

हँसती सी मुद्रा कुछ मुख की,

सोते में क्या तूने अपना बिगड़ा भाग्य बना देखा है।

तूने क्या सपना देखा है?

कवि आँखों में चमक और चेहरे पर खुशी देखकर कर प्रश्न पूछते है कि क्या कोई तुमने मीठा सपना देखा है जो तुम्हारी आँखों की पलकों पर सुख की बूंदें दिखाई दे रहीं है और चेहरे पर हंसी के कारण सुंदरता छाई है तो क्या तुमने नींद में अपने बिगड़े भाग्य को सँवरते देखा है क्या ?

क्या कोई एसा सपना देखा है जिसमें तुम्हारे बुरे दिन अच्छे दिन में बदलने वाले हैं |

इस कविता का भाव यह समझ में आता है कि बुरा समय चल रहा है और अच्छा समय आना उसके लिए असंभव है , मतलब व्यक्ति इतना निराशा में डूबा है कि सुख के दिन सपनों की बात ही हो गए हैं |

विशेषता: निराशा में भी आशा की किरण दिखाई देना व्यक्ति को स्वप्रेरना (सेल्फ मोटिवेशन ) देती है क्योंकि समय एसा बदल गया है कि भाग्य सुधरना सपने की बात हो गई है |

नभ में कर क्यों फैलाता है?

किसको भुज में भर लाता है?

प्रथम बार सपने में तूने क्या कोई अपना देखा है?

तूने क्या सपना देखा है?

खुशी से झूमकर अपने हाथों को फैलाते देखकर कवि कहते हैं कि आकाश की तरफ देखकर हाथ क्यों फैला रहे ? क्या किसी को अपनी बाहों में भर लेना चाहते हो ? क्या सपने पहली बार तुम्हें कोई अपना दिख गया है क्या ? जो तुम इस तरह खुशी से झूम रहे हो क्या कोई सपना देखा है क्या ?

विशेषता: समय एसा बुरा चल रहा है कि आज अपने भी दूर हो गए हैं, सपने में अपने लोग दिख रहे हैं जिसे तो बाहों में भर लेने के हाथ फैला रहा है| अर्थात स्वार्थी दुनिया में अपना वही है जिसके दिन अच्छे चल रहे हैं | स्वार्थी दुनिया को दिखाया है |

मृगजल से ही ताप मिटा ले

सपनों में ही कुछ रस पा ले

मैंने तो तन-मन का सपनों में भी बस तपना देखा है!

तूने क्या सपना देखा है?

कवि कहते हैं कि वास्तविक जीवन में तो खुशिया मिलने के आसार नहीं दिखते जिस प्रकार हिरण जमीन पर उठने वाली भाफ को पनि समझकर उसके पीछे भागता जाता है और वह पानी दूर - दूर चला जाता है,  उसी प्रकार तुम भी खुशियों के पीछे भाग रहे हो | सपनों में ही इच्छा पूरी होने के विचार से खुश हो लो |तुझे ही सब कुछ ठीक होने का अहसास करना होगा , वास्तविक जीवन में सपने पूरे नहीं हो सकते बस सपने में ही अपनी आशाओं को पूरा करने की खुशी प्राप्त का लो| तू सपनों में अपनी आशाएं पूरी कर ले , मैनें तो सपनों में भी अपने आप को तपते , तरसते देखा है | तू इतना खुश क्यों है क्या तूने कोई सपना देखा है ?

विशेषता: निराशा में डूबा व्यक्ति दूसरों को भी निराशा का ही संदेश देता है |

शब्दार्थ: मृगजल = जहां सिर्फ पानी का आभास होता लेकिन पानी नहीं होता/ मृग मरीचिका

तपना = जलना 




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