रामदास - रघुवीर सहाय RAMADAS - RAGHUVEER SAHAY
रघुवीर सहाय द्वारा रचित रामदास कविता राजनैतिक सच्चाई को सामने रखने वाली कविता है। रामदास काल्पनिक चरित्र है, जो आम आदमी का प्रतिनिधित्व करता है। रामदास की हत्या केवल व्यक्ति की हत्या नहीं, यह हमारी सोच, लोकतंत्र, व न्याय के प्रति आस्था की हत्या है।रामदास मरते हुए आधुनिक समाज की ठोस वास्तविकता है|तटस्थता और निरपेक्षता का भाव रामदास की हत्या के लिए ज़िम्मेदार है|
रामदास - रघुवीर सहाय
चौड़ी सड़क गली पतली थी
दिन का समय घनी बदली थी
रामदास उस दिन उदास था
अंत समय आ गया पास था
उसे बता, यह दिया गया था, उसकी हत्या होगी
शब्दार्थ: पतली-संकरी |घनी बदली-दिन के समय सूर्य छुप जाता है जो उदासी,निराशा का प्रतीक है| अंत समय-आखिरी समय|
व्याख्या:रामदास नामक एक आम व्यक्ति है यह उसी के विषय में है,एक दिन की बात है कि दिन के समय घने बादल छाए हैं,वहाँ सड़क चौड़ी (वाइड) लेकिन पतली गली से जुड़ा है,उस दिन रामदास उदास था,दुखी था क्योंकि आज उसका अंतिम समय आ गया था मरने वाला था और उसे बता, यह दिया गया था, उसकी हत्या होगी , रामदास को भी और लोगों को भी पता
विशेषता: आम व्यक्तियों की दयनीय हालत को बताया है |
धीरे-धीरे चला अकेले
सोचा साथ किसी को ले ले
फिर रह गया, सड़क पर सब थे
सभी मौन थे, सभी निहत्थे
सभी जानते थे यह, उस दिन उसकी हत्या होगी|
शब्दार्थ: मौन - चुप | निहत्थे - बिना शस्त्र |हत्या - मार दिया जाना |
व्याख्या: रामदास दुखी सा धीरे-धीरे मरने के लिए अकेला चल रहा था, वह मन ही मन सोचता है कि इस कठिन घड़ी में किसी को साथ ले लूँ लेकिन उसने देखा कि यहाँ तो सभी उपसतिथ थे, कोई कुछ नहीं बोल रहा था, रामदास को बचाने के लिए कोई कुछ नहीं बोल रहा था ना ही किसी के पास कोई शस्त्र था, सभी को मालूम था कि आज रामदास की हत्या होगी फिर भी सब चुप थे|
विशेषता: आम जनता की मानसिकता बताई है कि वे अपने आप को कमजोर समझते हैं किसी अत्याचार का विरोध नहीं करते और जो अन्याय हो रहा है उसे भाग्य समझकर स्वीकार करते हैं,वे न अपने लिए लड़ते हैं और न दूसरों के लिए|
खड़ा हुआ वह बीच सड़क पर
दोनों हाथ पेट पर रख कर
सधे क़दम रख कर के आए
लोग सिमट कर आँख गड़ाए
लगे देखने उसको, जिसकी तय था हत्या होगी|
शब्दार्थ:सधे - सम्हालकर | सिमट - सिकुड़ |तय - निश्चित |
व्याख्या: रामदास दोनों हाथ अपने पेट पर रखे बीच सड़क पर खड़ा था मतलब वह भी मरने के लिए बिना विरोध किये तैयार,और जो भीड़ खड़ी थी वे सभी सम्हाल कर चलते हुए उसके पास आ कर उसे मरते देखने के लिए आंखे गड़ाए खड़े हो गए ,मतलब दूसरों ने भी उसकी सहायता करनी की कोई कोशिश नहीं की |
विशेषता: यहाँ पर देश के लोगों की मानसिकता बताई है कि सब स्वार्थी हो गए हैं,भीड़ में खड़े लोग यह सोचकर ही खुश हैं कि उन्हें तो कुछ नहीं हो रहा है, वह मर रहा है मरने दो, इतनी विचार शक्ति नहीं है कल को हमारी भी बारी आ सकती है|
निकल गली से तब हत्यारा
आया उसने नाम पुकारा
हाथ तौल कर चाकू मारा
छूटा लहू का फव्वारा
कहा नहीं था उसने आख़िर उसकी हत्या होगी?
शब्दार्थ: हत्यारा - हत्या करने वाला |तौल - मजबूती | फव्वारा - तेजी से निकालने वाला तरल पदार्थ| लहू - खून,रक्त |
व्याख्या: भीड खड़ी थी तब ही चौड़ी सड़क की गली से एक हत्यारा निकाला और रामदास का नाम पुकारा और अपने हाथों में चाकू को मजबूती से पकड़कर चाकू से मार दिया जिससे खून का फव्वारा छूट गया, उसका खून चारों ओर बिखर गया| और भीड़ ने कहा उसने तो कहा ही था कि हत्या होगी तो हो गई|इस बात का किसी को कोई दुख नहीं हुआ सभी ने अत्याचार को सामान्य बात की तरह स्वीकार कर लिया |
विशेषता: लोगों के स्वार्थीपन के कारण हत्यारे बिना डरे घूमते हैण और खुली आम हत्या करते है उन्हें किसी का डर नहीं है क्योंकि जनता डरी है
भीड़ ठेल कर लौट गया वह
मरा पड़ा है रामदास यह
'देखो-देखो' बार बार कह
लोग निडर उस जगह खड़े रह
लगे बुलाने उन्हें, जिन्हें संशय था हत्या होगी।
शब्दार्थ: ठेल - धक्का देकर | निडर - बिना डरे | संशय - शक,शंका |
व्याख्या: गली से निकल कर हत्यारा आया और उसने चाकू से रामदास की हत्या की भीड़ देखती ही रही, किसी ने कुछ नहीं किया | जिस प्रकार वह आया उसी प्रकार भीड को धकेलकर हत्यारा वापस चला गया | वहाँ खड़ी भीड़ निडर होकर वहीं खड़ी रही और बार - बार कहने लागी देखो - देखो रामदास मरा पड़ा है और वह भीड़ उन लोगों को यह विश्वास दिला रही थी जिन्हें शक था कि रामदास की हत्या होगी , भीड़ उन लोगों को बुला कर मानों सबूत देना चाहती थी |
विशेषता: एसी स्तिथि में आम जनता हत्यारों से अधिक खतरनाक होती है जो निष्क्रिय हो जाती है , डरी हुई रहती,स्वार्थी बन जाती है क्योंकि एसे चुप रह जाने वाले लोग ही देश और समाज को खोखला करते है | जो काम हत्यारे चाकू से करते हैं , एसे लोग चुप रहकर मानवता की हत्या करते ही रहते है |
प्रश्न 1:एक शब्द या वाक्य में उत्तर लिखिए; 1 x 10=10
- पतली गली कहाँ पर थी? चौड़ी सड़क
- चौड़ी सड़क पर गली कैसी थी? पतली
- रामदास उस दिन कैसा था? उदास
- हत्या के दिन कौन उदास था? रामदास
- रामदास को क्या होगा बताया दिया गया था? उसकी हत्या
- अंत समय आने से कौनउदास था ? रामदास
- रामदास कैसे चला था? धीरे - धीरे
- सड़क पर सभी कैसे खड़े थे? मौन / निहत्थे
- रामदास दोनों हाथ पेट पर रखकर कहाँ खड़ा था? बीच सड़क
- सभी लोग कैसे कदमों से आगे आए? सधे
- आँखें गड़ाए किसे देखने लगे? जिसकी हत्या तय है
- हत्यारा कहाँ से निकाला? गली
- हत्यारे ने किससे मारा ? चाकू
- गली से निकालकर हत्यारे ने क्या पुकारा ? नाम
- ‘रामदास’ के रचनाकर का नाम ‘रघुवीर सहाय’ है |
प्रश्न 3:रामदास कविता का सारांश लिखकर उसकी विशेषताओं पर प्रकाश डालिए; 15
शीर्षक - रामदास
सारांश: स्वाधीनता के बाद जिस लोकतन्त्र की स्थापना हुई और उसमें साधारण जनता की जो हालत हुई वह रघुवीर सहाय की रामदास कविता में बहुत स्पष्ट है। इस कविता के सन्दर्भ में वे कहते हैं “उनके भीतर दुःख की कई परतें समाई हुई हैं और दुःख के खिलाफ कई सतहें भी और इसमें रचनात्मकता के कई प्रयत्न समाहित हैं और मानवीय सभ्यता पर तथा मानवीय आत्मा पर आक्रमण को निरस्त करने के कई प्रयत्न हैं।” इस तरह लोकतन्त्र की सच्चाई को वे पूरे साहस के साथ इस कविता में सबके सामने लाते हैं। इस कविता में एक सपाट और सीधा वक्तव्य है क्योंकि वे जानते हैं कि दो अर्थ वाले शब्द हमेशा खतरनाक होते हैं, सत्ता इनका उपयोग अपने पक्ष में कर सकती है, इसलिए वे पहले ऐसी भाषा पाना चाहते हैं, जिसके दो अर्थ न हो।
रघुवीर सहाय की यह कविता उनके समकालीन सन्दर्भों के साथ-साथ वर्तमान सन्दर्भ की भी कविता है। यह आम आदमी की निस्सहायता की कविता है, हत्या की सरेआम घोषणा के बावजूद अपनी जान न बचा पाने की, अकेले पड़ जाने की, मृत्यु के कुछ क्षण पहले की घनघोर उदासी की और समाज के संवेदनहीनता की कविता है। हत्यारा रामदास को मारने की घोषणा पहले ही कर चुका है। हत्यारे की यह हिम्मत क्रमशः ही बढ़ी होगी। इस बात की भी प्रबल सम्भावना है कि हत्यारे के पीछे किसी राजनीतिक सत्ता का समर्थन होगा, फिर भी उसकी हिम्मत बढ़ने का सबसे बड़ा कारण लोगों में आपसी एकजुटता का न होना है, एक-दूसरे के प्रति अविश्वास का होना है। इसीलिए कविता में रामदास एक बार किसी को साथ ले लेने के बारे में सोचता तो है, पर या तो वह इसी अविश्वास के कारण किसी को नहीं बुलाता है या फिर लोग एकता की कमी या भय के कारण उसका साथ नहीं देते। सभी लोग रामदास की इस पूर्व घोषित हत्या के मूक दर्शक हैं, हत्यारा फिर उसी भीड़ के बीच से वापस लौटता है, लेकिन कोई प्रतिरोध का एक शब्द तक नहीं बोलता।
शायद इस डर से कि कहीं उसकी भी हत्या न हो जाए। लेकिन इस कविता का सन्देश ही है कि यह रामदास कोई भी जन सामान्य हो सकता है। मूक दर्शकों में से ही कोई अगला रामदास हो सकता है। दरअसल यह मानवता और जन साधारण की सरेआम हत्या की कविता है।
रघुवीर सहाय की इस कविता में भी आद्योपान्त भय विद्यमान है, ऐसा भय जो रीढ़ तक समाता है। मुक्तिबोध की कविताओं में भय फैण्टेसी के रूप में और जटिलता के साथ आता है, तो यहाँ भय की अभिव्यक्ति अत्यन्त सरल शब्दों व प्रतीकों के माध्यम से हुई है। कवि का उद्देश्य इस कविता में एक साधारणनिरीह मनुष्य की हत्या की त्रासदी का वर्णन करना भर नहीं है बल्कि वह ऐसी हत्याओं के प्रति लोगों की सो चुकी संवेदना को जगाना चाहता है कि ऐसी हत्या का अगला ग्रास वे स्वयं न बनें।
विशेषता: रामदास उदास है सभी को यह पता है, कि उसकी हत्या होगी पर उसकी सहायता करने के बजाए वे रामदास की हत्या के एक एक क्षण का आनंद उठाना चाहते हैं, ताकि वे, यह बता सकें कि देखा हत्यारे कितने बलवान हैं। ऐसे हीं व्यक्तियों और समाज से कवि हताश और निराश हैं। और यही निराशा और हताशा उन्हें रामदास कविता लिखने पर मजबूर कर देती है ।संदेश यही है कि हर व्यक्ति को अपने मुद्दों के लिए लड़ने के लिए अपने आप को सशक्त बनाना चाहिए, इसके लिए जरूरी है कि हर व्यक्ति को अपने अधिकारों की जानकारी और कर्तव्यों की जिम्मेदारी होना चाहिए और यह लोकतंत्र की सुंदरता है|
प्रश्न 4: टिप्पणी लिखिए;कोई 1 6 x 1=6
1. उसकी हत्या होगी
उत्तर 4;1. यह शीर्षक पाठ्यक्रम की कविता जो कवि रघुवीर सहाय की प्रसिद्ध कविता "रामदास" से लिया गया है |
इस कविता का विषय आम लोगों का आचरण है। ये लोग न केवल खुलेआम हुई हत्या के निष्क्रिय दर्शक हैं, बल्कि कविता के अंत तक आते-आते इस हत्या की अनिवार्यता के उत्साही समर्थक हो जाते हैं। कवि ने प्रतिक स्वरूप ‘रामदास’ का नाम लिया है | किसी को दूसरे के साथ हो रहे अन्याय से कोई मतलब नहीं औरइसे लोग अपने लिए भी लड़ते नहीं है| एसे लोग देश और समाज के लिए घातक होते है|
यहाँ पहले तो हत्या का तमाशा देखते लोग हत्या होने के बाद मानो राहत की साँस लेते हैं और उसकी अनिवार्यता का बखान करते हैं---कहा नहीं था......। इसके बाद वे इसका उत्सव-सा मनाने लगते हैं। हत्यारे के चले जाने के बाद बार-बार एक दूसरे को मृत रामदास का शव दिखाकर उसकी मौत का भरोसा दिलाते हैं। इतना ही नहीं वे उन लोगों को शर्मिंदा करने के लिए खोजते हैं, जिन्हें हत्या की अनिवार्यता में संदेह था। ज़ाहिर है वे इस रीत-नीत से असहमत लोग रहे होंगे।
दूसरी तरफ़, आम लोगों के रवैये में किसी प्रकार के अफ़सोस की झलक तक नहीं है। कवि का रुख़ भी उनके प्रति उतना ही निष्करुण है। वह लोगों के वहां खड़े रह जाने को उनकी "निडरता" की संज्ञा देकर उन पर अत्यधिक कठोर व्यंग्य करता है। लोगों की कमज़ोरियों या उनके पतन को वह मानो उनका चुनाव मानता है,और ख़ुद मनुष्यता का नाटक करते हैं |
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