प्रियतम, सूर्यकांत निराला SUMMARY ANNOTATION QU & ANS - Priyatam Ramadhari Singh 'Dinakar' SEP

 प्रियतम-सूर्यकांत निराला -  Priyatam Ramadhari Singh 'Dinakar'

एक दिन विष्‍णुजी के पास गए नारद जी,

पूछा, "मृत्‍युलोक में कौन है पुण्‍यश्‍यलोक

भक्‍त तुम्‍हारा प्रधान?"

विष्‍णु जी ने कहा, "एक सज्‍जन किसान है

प्राणों से भी प्रियतम।"

"उसकी परीक्षा लूँगा", हँसे विष्‍णु सुनकर यह,

कहा कि, "ले सकते हो।"

संकेत: एक दिन ---------------- ले सकते हो |

प्रसंग : काव्य दीप्ति में संकलित कविता प्रियतम, कवि सूर्यकांत निराला है से ली गई हैं |

संदर्भ: कवि ने विष्णु और नारद से संबंधित एक पौराणिक कथा के माध्यम से यह सिद्ध करने का प्रयत्न किया है कि जीवन में अपने कर्तव्यों तथा उत्तरदायित्वों को निभाने वाला व्यक्ति ही श्रेष्ठ है तथा वही ईश्वर को प्रिय है।

व्याख्या: यह पंक्तियाँ मैथोलॉजी पर की कल्पना है जिसमें भगवान विष्णु और नारद मुनि की बातचीत बताई गई है | एक दिन ऋषि नारद , भगवान विष्णु से पूछते हैं कि इस मृत्यु लोक में आपका कौन सा मुख्य भक्त है जिसका नाम आप ले सकते हैं ? विष्णु जी ने कहा है एक सज्जन , सीधा - सादा किसान जो मुझे अपने प्राणों से भी अधिक प्रिय है | यह सुनते ही नारद जी ने कहा तो ठीक है मैं भी उसकी परीक्षा लूँगा कि क्यों वह आपका प्रधान भक्त है ! यह सुनकर विष्णु जी हँसे और कहा ठीक है आप उसकी परीक्षा ले सकते हैं |

विशेषता: सच्चे भक्त की पहचान उसके आराध्य को होती है, भगवान भक्ति देते हैं और भगवान की परीक्षा होती है जैसे नारद मुनि , भगवान विष्णु की परीक्षा उनके सच्चे और अच्छे भक्त के रूप में लेते हैं|

शब्दार्थ: मृत्‍युलोक - जहां रहने वालों की मृत्यु होती है|पुण्‍यश्‍यलोक-जिसका चरित्र बहुत शुभ और सुन्दर हो |

नारद जी चल दिए

पहुँचे भक्‍त के यहॉं

देखा, हल जोतकर आया वह दोपहर को,

दरवाज़े पहुँचकर रामजी का नाम लिया,

स्‍नान-भोजन करके

फिर चला गया काम पर।

शाम को आया दरवाज़े फिर नाम लिया,

प्रात: काल चलते समय

एक बार फिर उसने

मधुर नाम स्‍मरण किया।

संकेत: नारद जी ------------ स्मरण किया |

प्रसंग : पूर्वत|

संदर्भ: नारद जी भक्त किसान के घर जाते हैं |

व्याख्या: नारद मुनि , भगवान विष्णु द्वारा बताए उनके भक्त के घर जाते हैं और उसकी दिनचर्या देखते हैं कि वह किस प्रकार प्रिय, चरित्रवान भक्त है | वे देखते हैं कि किसान खेत जोत कर दोपहर में घर आया, दरवाजे पर पहुंचकर राम का नाम याद किया , नहाकर , भोजन करके वापस काम पर चला गया | शाम को खेत से फिर वापस घर आया , दरवाजे पर राम का नाम लिया| और अगली सुबह काम पर जाते समय राम का मधुर नाम याद किया |

विशेषता: नारद मुनि जानना चाहते हैं कि एक विशेष भक्त में क्या - क्या गुण होना चाहिए और किसान की दिनचर्या से यह स्पष्ट है कि उसका काम/कर्तव्य ही भगवान की भक्ति है |

शब्दार्थ : हल - वह यंत्र या औजार जिससे बीज बोने के लिये जमीन जोती जाती है । वह औजार जिसे खेत में सब जगह फिराकर जमीन को खोदते और भुरभुरी करते हैं । सीर । लांगल ।

जोतकर - खेती,किसानी का काम | मधुर - मीठा,अच्छा लगाने वाला |

"बस केवल तीन बार?"

नारद चकरा गए-

किन्‍तु भगवान को किसान ही यह याद आया?

गए विष्‍णुलोक

बोले भगवान से

"देखा किसान को

दिन भर में तीन बार

नाम उसने लिया है।"

संकेत: “बस केवल ------------------ लिया है |

प्रसंग: पूर्ववत

संदर्भ: नारद जी किसान की दिनचर्या देखाकर आश्चर्यचकित होते हैं|

व्याख्या: नारद मुनि देखते हैं कि किसान दिनभर में सिर्फ तीन बार ही भगवान नाम लेता है और कोई अधिक पूजा - पाठ नहीं करता है, फिर क्यों भगवान को चरित्रवान सच्चे भक्त के नाम पर किसान ही याद आता है ? नारद मुनि विष्णुलोक में जाकर उनसे कहते हैं कि “देखा मैंने किसान को, दिनभर में उसने सिर्फ तीन ही बार नाम लिया है आपका, और आप उसे अपना पुण्यशलोक भक्त कहते हैं !

विशेषता: नारद मुनि विष्णु भगवान की नहीं बल्कि भक्त की परीक्षा लेना चाहते हैं क्योंकि वे जानना चाहते हैं कि एक सच्चा भक्त कैसा होना चाहिए |

ब्दार्थ: विष्णु लोक - विष्णु जी का स्थान | चकरा - आश्चर्यचकित |

बोले विष्‍णु, "नारद जी,

आवश्‍यक दूसरा

एक काम आया है

तुम्‍हें छोड़कर कोई

और नहीं कर सकता।

साधारण विषय यह।

बाद को विवाद होगा,

तब तक यह आवश्‍यक कार्य पूरा कीजिए

तैल-पूर्ण पात्र यह

लेकर प्रदक्षिणा कर आइए भूमंडल की

ध्‍यान रहे सविशेष

एक बूँद भी इससे

तेल न गिरने पाए।"

लेकर चले नारद जी

आज्ञा पर धृत-लक्ष्‍य

एक बूँद तेल उस पात्र से गिरे नहीं।

व्याख्या: नारद मुनि की बाते सुनकर भगवान विष्णु ने कहा कि इस विषय पर हम वाद - विवाद बाद में करेंगे,पहले एक जरूरी काम आया है पहले उसे पूरा कर लीजिए और वह एसा अनोखा काम है कि आपके सिवाय कोई नही कर सकता है |

और वह कार्य यह है कि एक बर्तन में तेल लेकर पूरे भूमंडल की प्रदक्षिणा करना है और विशेष ध्यान यह रखना है कि एक बूंद भी तेल पात्र से बर्तन से बाहर नहीं गिरना चाहिए |

प्रभु की बात सुनते ही नारद मुनि हाथ में तेल से भरा पात्र लेकर पृथ्वी की परिक्रमा करने निकल पड़े और आज्ञा पर पूरा ध्यान केंद्रित कर लिया कि एक बूंद तेल भी उस बर्तन से बाहर न गिरे |

विशेषता: भगवान ने अप्रत्यक्ष रूप से मुनि नारद को यह बताने का प्रयास किया कि किसी भी कार्य को ध्यानपूर्वक करने के क्या फायदे होते है और उसके लिए समर्पण चाहिए विधि - विधान की आवश्यकता नहीं होती और इस घटना से पाठकों को सीख दे रहे हैं |

शब्दार्थ: धृत-लक्ष्‍य - दृढ़ता से लक्ष्य की ओर बढ़ना|

योगीराज जल्‍द ही

विश्‍व-पर्यटन करके

लौटे बैकुंठ को

तेल एक बूँद भी उस पात्र से गिरा नहीं

उल्‍लास मन में भरा था

यह सोचकर तेल का रहस्‍य एक

अवगत होगा नया।

नारद को देखकर विष्‍णु भगवान ने

बैठाया स्‍नेह से

कहा, "यह उत्‍तर तुम्‍हारा यही आ गया

बतलाओ, पात्र लेकर जाते समय कितनी बार

नाम इष्‍ट का लिया?"

"एक बार भी नहीं।"

व्याख्या: योगिराज नारद जल्दी विश्व की परिक्रमा करके बैकुंठ अर्थात विष्णु लोक पहुँच गए , उनके मन में बहुत खुशी थी कि आज्ञा के अनुसार एक बूंद भी तेल बाहर नहीं गिरा है | मन में अधिक खुशी हो रही थी कि अब और भी कुछ नया विचार जानने मिलेगा कि एसा करने के पीछे रहस्य क्या है | क्योंकि उस समय तो भगवान ने उन्हें तुरंत यात्रा पर भेज दिया था कि आने बाद चर्चा होगी |

नारद को देखते ही भगवान विष्णु न उन्हें बहुत प्यार से बैठाया और कहा कि किसान का ही नाम मैंने क्यों लिया इस प्रश्न का उत्तर आपके पास अपने - आप ही आ गया ! बतलाइए तेल का बर्तन लेकर जाते समय आपने - अपने इष्ट भगवान का नाम कितनी बार लिया ? मुनि नारद ने कहा ‘एक बार भी नहीं’ |

विशेषता: भगवान विष्णु ने नारद के प्रश्न का उत्तर उनसे ही दिलवा दिया कि काम की एकाग्रता ही भगवान की भक्ति है |

शब्दार्थ: बैकुंठ - स्वर्ग |पात्र -बर्तन |उल्लास - खुशी |इष्ट - प्रिय |

शंकित हृदय से कहा नारद ने विष्‍णु से

"काम तुम्‍हारा ही था

ध्‍यान उसी से लगा रहा

नाम फिर क्‍या लेता और?"

विष्‍णु ने कहा, "नारद

उस किसान का भी काम

मेरा दिया हुया है।

उत्तरदायित्व कई लादे हैं एक साथ

सबको निभाता और

काम करता हुआ

नाम भी वह लेता है

इसी से है प्रियतम।"

नारद लज्जित हुए

कहा, "यह सत्‍य है।"

व्याख्या: विष्णु जी के प्रश्न पर कि तेल का बर्तन लेकर जाते समय अपने इष्ट को कितनी बार याद किया तो नारद कहते हैं कि काम तो आपने ही दिया था पूरा ध्यान तो उसी में लगा था कि एक बूंद भी बाहर नहीं गिरना चाहिए तो कहाँ से अपने इष्ट देव को याद कर पाता मै?

नारद के इस जवाब पर विष्णु जी ने कहा कि जो आप बोल रहे थे कि किसान ने सिर्फ तीन बार ही राम का नाम लिया फिर भी उसे ही आपने पुण्यशलोक भक्त क्यों कहा! तुम्हारा यह जवाब उस प्रश्न का उत्तर भी है| उस किसान को दिया हुआ काम भी मेरा ही है , उसे वह उसी एकाग्रता से करता है जिस एकाग्रता से आप अभि तेल का बर्तन लेकर परिक्रमा कर के आए हैं |

उसके ऊपर कई सारे उत्तरदायित्व हैं और वह सारे उत्तरदायित्व ईमानदारी से पूरे करता है , काम भी करता हऔर भगवान का नाम भी लेता है इसीलिए वह किसान मेरा प्रियतम भक्त है, मेरा अनन्य भक्त है | यह सुनकर नारद शर्मिंदा हुए और उन्होंने कहा आपका वचन सत्य है और वह किसान आपका सच्चा भक्त है |

विशेषता:भगवान विष्णु किसान को अपना सबसे बड़ा भक्त मानते हैं। नारदजी को यह बात अच्छी नहीं लगती और वे नम्रतापूर्वक उसका विरोध करते हैं। भगवान् नारद जी की परीक्षा लेते हैं जिसमें वे सफल नहीं हो पाते। अन्त में नारदजी अपनी हार स्वीकार कर लेते हैं। निराला जी प्रस्तुत कविता के जरिए यह संदेश देना चाहते हैं कि कर्म ही ईश्वर है। इसलिए हर एक व्यक्ति को कर्म करना चाहिए। कर्म से निवृत्त रहकर सिर्फ भगवान का नाम लेने से कोई आगे नहीं बढ़ सकता या ईश्वरीय सान्निध्य प्राप्त नहीं कर सकता। कर्म करते हुए तथा सारी जिम्मेदारियों का निर्वाह करते हुए भी भगवान का नाम नहीं भूलना चाहिए।

प्रश्न 1: एक शब्द या वाक्य में उत्तर लिखिए; 1 x 10 = 10

  • नारद जी ने विष्णु जी से किसके बारे में पूछा ?सबसे प्रिय भक्त ।
  • विष्णु जी ने किसे अपना प्रियतम बतलाया ? किसान
  • विष्णु जी के उत्तर सुनकर नारदजी ने क्या निर्णय लिया ?परीक्षा लेना |
  • नारद जी क्या देखकर चकरा गये ? केवल तीन बार ही भगवान का नाम
  • नारद जी विष्णु जी से कैसा भक्त पूछा ? प्रधान
  • नारद जी ने कहाँ के पुण्यश्लोक भक्त के बारे में पूछा? मृत्युलोक
  • विष्णुजी प्राणों से भी प्रियतम भक्त किसे कहते हैं?किसान
  • विष्णुजी ने नारद से अपने भक्त की परीक्षा लेने को कैसे कहा?हँसकर
  • नारद जी किसकी परीक्षा लेते हैं? किसान/विष्णु भक्त
  • किसान दोपहर को क्या जोतकर घर लौट आया? हल
  • दरवाजे पर पहुंचकर किसान ने किसका नाम लिया? रामजी
  • स्नान - भोजन करके किसान कहाँ पर चला गया?काम
  • किसान ने मधुर नाम कब याद किया ? प्रात:काल
  • किसान ने भगवान का नाम कितनी बार लिया?3
  • किसान को सिर्फ 3 बार ही नाम लेने पर कौन चकरा गए? नारद जी
  • किसान को देखने के बाद नारद जी कहाँ गए? विष्णुलोक
  • विष्णु जी ने नारद जी को मुरत्युलोक से आते ही कैसे काम पर भेज दिया? आवश्यक
  • विष्णु जी नारद जी को किस से भर पात्र लेकर भूमंडल का चक्कर लगाने कहा ? तेल
  • तेल से भरा पात्र लेकर विष्णु जी ने नारद जी किसका चक्कर लगाने कहा? भूमंडल
  • एक बंद भी तेल ना गिरे यह विष्णु जी किससे कहा?नारद जी
  • नारद जी एक बंद तेल भी बाहर न गिए किसने कहा? विष्णु जी
  • नारद जी परिक्रमा करने निकले तो सारा ध्यान किस पर था? तेल
  • विश्वपर्यातन करके नारद जी कहाँ लौटे? बैकुंठ
  • किसका रहस्य जानने जानने का उल्लास नारद जी के मन में था? तेल
  • तेल का पात्र लेकर जाते समय नारद जी ने अपने इष्ट का नाम कितनी बार लिया? एक बार भी नहीं
  • किसान किसका काम करता था? भगवान
  • लज्जित होकर नादार जी ने क्या कहा ? यह सत्य है
  • प्रियतम कविता के रचनाकर का नाम क्या है ? सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
  • प्रश्न 4: टिप्पणी लिखिए;कोई एक 6 x 1 = 6

    1. नारद जी 2. विष्णु जी का संदेश

    प्रश्न 4;1 नारद जी

    शीर्षक काव्य दीप्ति में संकलित कविता प्रियतम, कवि सूर्यकांत निराला है से लिया गया हैं |

    नारद जी स्वर्ग में रहने वाले हैं मुनि हैं विष्णु जी के पास जाकर कहते हैं कि मृत्युलोक में आपका परम भक्त कौन है तो विष्णु जी एक अपने भक्त किसान के विषय में बताते हैं तो नारद जी कहते हैं कि मैं एसे ही नहीं माँ लूँगा उसकी परीक्षा भी लूँगा कि क्या वह सच्चा भक्त है! विष्णु जी पूरे विश्वास के साथ हँसकर कहते हैं कि अवश्य लीजिए |नारद जी किसान के दरवाजे पहुँच जाते है और पाते हैं कि वह सिर्फ तीन बार ही राम का नाम लेता है , की पूजा - पाठ , विधि - विधान नहीं करता है फिर भी भगवान इसे अपना प्रीयतम भक्त मानते हैं | वैकुंठ पहुंचकर विष्णु जी से कहते हैं कि आपका परम भक्त तो सिर्फ तीन बार ही आपका नाम लेता है तो वह कैसे आप उसे अपना प्रियतम भक्त मानते हैं | इस बात को नारद जी विष्णु कहते हैं कि एक तेल का बर्तन लेकर उसे भूमंडल घुमाकर लाना है और एक बंद भी तेल गिरना नहीं चाहिए, वे तुरंत आज्ञा का पालन करते हैं और उल्लास से लौटकर आते हैः तो विष्णु जी समझाते हैं कि जिस प्रकार आपने मेरा दिया हुआ काम ध्यान लगाकर पूरा किया वैसे ही किसान भी अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से पूरा करता है इसलिए वह मेरा प्रिय भक्त है |यह सुनकर नारद जी को समझ में आता है कि सच्चे भक्त की पहचान क्या है |

  • Sammary: "कर्म ही पूजा है" इसी भाव को व्यक्त करने के लिए कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने इस कविता की रचना की है। निराला जी एक क्रांतिकारी कवि थे। वे कर्म को ही ईश्वर की पूजा मानते थे। वे कहते कर्मवीर ही इस संसार का सच्चा प्राणी है।

    इस कविता का भाव पौराणिक कथा पर आधारित है। नारद जी को मोह हो जाता है। होता है, मोह किसे छोड़ा है। उन्हें लगा कि वही भगवान विष्णु के सबसे प्रिय भक्त हैं। बस यही बात श्री विष्णु जी के मुख से सुनने के लिए विष्णु लोक जा पहुंचे। लेकिन पूछने पर विष्णु जी ने अपना सबसे प्रिय भक्त किसान को बताया। नारद जी आश्चर्य में पड़ गये। कहां, अच्छा तो मैं उसे जाकर देखूंगा। विष्णु ने कहा, जाओ, देख लो।

    नारद जी किसान की निगरानी में लग गए। उन्होंने देखा कि किसान तो दिनभर में मात्र तीन बार ही भगवान का नाम लिया। बस, उन्हें अवसर मिल गया अपनी श्रेष्ठता साबित करने का। दौड़े चले आए विष्णु लोक। भगवान तो अंतर्यामी है। वे सब कुछ समझ गये। नारद के आते ही एक काम और दे दिया। कहा कि यह घृत भरा पात्र पूरे ब्रह्मांड में घुमा दो , लेकिन ध्यान रहे, एक बूंद भी घी गिरने न पाए। नारद जी ने वैसा ही किया। बड़े ध्यान से घृत पात्र पूरे ब्रह्मांड में घूमा लाए। तब विष्णु जी ने पूछा अब बताओ कितने बार नाम लिया मेरा। नारद जी ने कहा, काम तो आप का ही कर रहा था। फिर नाम तो बिल्कुल नहीं लिया। विष्णु ने कहा, किसान को भी मैंने ही काम दिया है। फिर भी वह तीन बार नाम लिया।अब तुम ही बताओ, कौन श्रेष्ठ ? नारद जी लज्जित हो गये। यही है कर्म का महत्व।

    प्रियतम' कविता के रचयिता सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' हैं। प्रस्तुत कविता में कवि ने विष्णु और नारद से संबंधित एक पौराणिक कथा के माध्यम से यह सिद्ध करने का प्रयत्न किया है कि जीवन में अपने कर्तव्यों तथा उत्तरदायित्वों को निभाने वाला व्यक्ति ही श्रेष्ठ है तथा वही ईश्वर को प्रिय है।

  • प्रश्न 4;2 विष्णु जी का संदेश

    शीर्षक काव्य दीप्ति में संकलित कविता प्रियतम, कवि सूर्यकांत निराला है से लिया गया हैं |

    विष्णु जी ने नारद मुनि के प्रश्न के उत्तर से समस्त संसार को संदेश दिया है कि मन की एकाग्रता और कर्तव्य निष्ठा ही भगवान की सच्ची पूजा है | नारद जी ने पूछा कि मृत्युकोल में आपका सच्चा भक्त कौन है तो विष्णु जी ने एक किसान के विषय में बताया , नारद जी ने परीक्षा भी ली और बताया कि वह दिनभर में 3 बार नाम लेता है | विष्णु जी अपने भक्त की भक्ति सिद्ध करने के लिए नारद जी काम बताया कि बर्तन में तेल लेकर पूरी पृथ्वी में बिना एक बंद गिराए घुमाकर लाना है | नारद जी सफलतापूर्वक यह कार्य करके उल्लास से विष्णु जी के पास जाते हैं तो प्रभु पूछते हैं इस कार्य को करते समय आपने अपने इष्ट को कितनी बार याद किया , उन्होंने कहा एकबार भी नहीं, और आपका ही दिया कार्य है अब याद क्या करूँ ! विष्णु जी ने कहा यही आपके प्रश्न का जवाब है | किसान जो भी करता है वह उसे मेरा ही दिया हुआ काम है, उसकी बहुत सारी जिम्मेदारिया है सभी पूरा करता है , और आपने बताया उसने तीन बार राम का नाम लिया और आपने तो एक बार भी नहीं ! तो बताइए कौन श्रेष्ठ भक्त हुआ ? नारद मुनि अपने प्रश्न पर शर्मिंदा हुए | संदेश यही दिया कि जिम्मेदारियों को छोड़कर भजन - पूजन में लगे रहना सच्ची भक्ति नहीं है बल्कि किसान के जैसे कर्तव्यों को पूरा करना और भगवान को याद कर लेना चाहिए|

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