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प्रेमामृत - मीराबाई BBA 3 sem

डाक बंगला - कमलेशवर

‘समर शेष है” रामधारी सिंह ‘दिनकर’ (परशुराम की प्रतीक्षा, 1953)

ठुकरा दो या प्यार करो - - सुभद्रा कुमारी चौहान